रांची।
राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari की मौजूदगी में एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई, जिसने पूरे मीडिया जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ाई है, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर विवाद
घटना के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री Hemant Soren ने मीडिया को संबोधित किया। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी उनके साथ मौजूद थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। न ही किसी तरह की जांच या कार्रवाई का संकेत दिया गया।
इस चुप्पी को लेकर पत्रकारों और आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज कर रही है?
रांची प्रेस क्लब में विरोध
इस घटना के विरोध में Ranchi Press Club में पत्रकारों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। पत्रकारों का कहना है कि अगर उनके साथ इस तरह का व्यवहार होगा, तो लोकतंत्र की मूल भावना पर ही आंच आएगी।
विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि मीडिया समुदाय अब इस मुद्दे पर चुप बैठने को तैयार नहीं है और न्याय की मांग कर रहा है।
लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र और सुरक्षित पत्रकारिता की भूमिका बेहद अहम होती है। यदि पत्रकारों को डर या दबाव में काम करना पड़े, तो सच्चाई सामने आना मुश्किल हो जाता है।
इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या राज्य में पत्रकार सुरक्षित हैं? और क्या उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है?
कार्रवाई की उठी मांग
पत्रकारों और विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकार स्पष्ट संदेश दे कि पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



