
रांची। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सोमवार को झारखंड पेसा नियमावली को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की। यह बैठक मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आयोजित हुई, जिसमें वरीय अधिकारियों और विभागीय सचिवों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना और ग्राम सभाओं को अधिकारों से और अधिक सशक्त बनाना था।


मुख्यमंत्री ने पेसा कानून के विभिन्न उपबंधों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली का क्रियान्वयन इस प्रकार होना चाहिए जिससे न केवल स्थानीय स्वशासन की परंपरा को मजबूती मिले, बल्कि आदिवासी समुदायों का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि नियमावली के प्रावधानों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने जोर दिया कि ग्राम सभा केवल औपचारिक संस्था न होकर, वास्तविक रूप से निर्णय लेने वाली और विकास को दिशा देने वाली इकाई बने। पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाओं को प्रदत्त शक्तियों का उपयोग इस तरह हो कि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों को उनके अधिकारों और संसाधनों पर पूरा नियंत्रण मिले।
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि नियमावली को लागू करने की प्रक्रिया पारदर्शी और सहभागी होनी चाहिए। ग्राम स्तर पर इसकी जानकारी और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं ताकि आमजन भी इससे लाभान्वित हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इससे न केवल सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य में जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को भी मजबूती मिलेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, प्रधान सचिव श्रीमती वंदना दादेल, श्री एम.आर. मीणा, विधि विभाग के प्रधान सचिव श्री नीरज कुमार श्रीवास्तव, सचिव श्री प्रशांत कुमार, सचिव श्री अमिताभ कौशल, सचिव श्री कृपानंद झा, सचिव श्री के. श्रीनिवासन, सचिव श्री मनोज कुमार, सचिव श्री चंद्रशेखर, सचिव श्री अरवा राजकमल, पंचायती राज निदेशक श्रीमती राजेश्वरी बी, निदेशक खान श्री राहुल सिन्हा, महाधिवक्ता श्री राजीव रंजन, पीसीसीएफ श्री अशोक कुमार, वन संरक्षक श्री पी.आर. नायडू, डीएफओ श्री दिलीप कुमार, विशेष सचिव श्री प्रदीप कुमार हजारी और संयुक्त सचिव श्री रवि शंकर विद्यार्थी मौजूद रहे।
बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि पेसा नियमावली को लागू करने के लिए विभागीय स्तर पर जल्द ही ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसके जरिए अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक स्वशासन को मजबूत करने और आदिवासी समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।


