



पटना | पटना समाहरणालय की कार्यसंस्कृति बदलने को उत्सुक जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल रविवार को खुद क्लर्क की भूमिका में नज़र आए | अधीनस्त जहा उनका यह रूप देखकर दग़ थे वही इसके जरिए जिलाधिकारी ने क्लर्क को काम तेज़ी से निपटाने के गुर भी सिखाए | बताया गया है की समाहरणालय के विधि शाखा में निरीझण के दौरान डीएम की नज़र में स्टाप रिफ़ड के मामले से जुडी 375 फाइले आई | डीएम ने पूछा की इसका निस्तारण किस प्रकार होता है । तो जवाब मिला उससे उनका आकलन था की इसमे दो साल से ज्यादा का समय लग जायेगा | बस डीएम तत्काल वहा बैठ गए और काम के निस्तारण का तरीका सबधित अधीनस्थों को बताने लगे |
फटाफट काम निपटने और डाटा दुरुस्त करने के बाद क्लर्क ने भी माना की इस तरह से काम होगा तो महीने भर में फाइले निपट जाएगी | कर्मचारियों ने डीएम के काम करने के तरीके अपनाने का सकल्प लिया | निरीझण के दौरान एक महिला कर्मचारी के अधिक उम्र का प्रतीत होने पर उन्होंने उससे जन्मतिथि की जानकारी ली तो पता चला की वह पचपन साल की है |

