
JAMSHEDPUR।
प्राचीन कला केन्द्र द्वारा जमशेदपुर के इवनिंग क्लब में आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय संगीत कार्यक्रम ‘‘शाम ए मौसिकी’’ के पहले दिन सधे हुए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी ।
⁰


कार्यक्रम में सबसे पहले अनुभवी शास्त्रीय गायक पंडित भूतनाथ डे ने कार्यक्रम की शुरूआत की । इन्होंने राग पूरीया कल्याण में आलाप से कार्यक्रम आरंभ करके, विलम्बित एक ताल की बंदिश ‘‘सांझ भई घर जाने दे कान्हा’’ पेश की । इसके उपरांत एक द्रुत बंदिश जो तीन ताल में निबद्ध थी पेश की जिसके बोल थे ‘‘नहीं परे मन का चैन सखी री’’ कार्यक्रम का समापन इन्होंने एक ठुमरी से किया ।‘‘अरे ओ पिया तोरी तिरछी नज़र लागे प्यारी’’बोलों से सजी इस ठुमरी से पंडित भूतनाथ ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । इनके साथ मंच पर श्री देबाशीश बैनर्जी ने तबले पर एवं मनमोहन सिंह ने हारमोनियम पर संगत की ।
इसके उपरांत श्री सुभाशीश बोस ने मंच संभाला । इन्होंने अपने मधुर हंसवीणा वादन से दर्शकों का मनोरंजन किया । इन्होंने राग नंददेश्वरी से कार्यक्रम की शुरूआत की । जिसमें इन्होंने तीन ताल में विलम्बित एवं द्रुत गतें पेश की और एक खूबसूरत धुन से कार्यक्रम का समापन किया । इनके साथ तबले पर प्रदीप भट्टाचार्य ने बखूबी संगत की ।
कार्यक्रम के अंतिम भाग में त्रिधारा के तहत गायन,सितार एवं बांसुरी से सजी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा । इस प्रस्तुति में राग जोग में निबद्ध रूपक ताल की बंदिश ‘‘गुरू बिना ज्ञान कैसे पाउं’’ एवं तीन ताल में सजन मोरे घर आये’’ बोलों से सजी
बंदिशें पेश की गई और एक तराना भी पेश किया गया । कार्यक्रम के अंत में ठुमरी पेश की गई । इनके साथ मंच पर अमितवा सेन एवं स्वरूप मैत्रा ने तबले पर पर संगत की ।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के सूत्रधार श्री सुब्राता डे ने कलाकारों को पुष्प देकर सम्मानित किया ।

