
जमशेदपुर.

लौहनगरी में बड़ी संख्या में युवा महिलाएं अपने स्टार्ट अप को लेकर गंभीरता और मनोयोग से कार्य कर रही हैं.आए दिन महिलाओं के स्टार्ट अप परवान चढते देख लोग ‘फील गुड’ महसूस कर रहे हैं..आत्मनिर्भरता से ही स्वतंत्रता की असली राह खुलती है और सबसे अच्छी बात यह है कि स्टार्ट अप खुद की आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर दूसरों को रोजगार भी प्रदान करता है.अपने स्टार्ट अप से अलग पहचान बनाने वाली जमशेदपुर की दो उत्साही युवा महिलाओं फैशन डिजाइनर स्नेआ और आर्टिस्ट सुमन प्रसाद से आदित्यपुर के होटल क्रुज में लोग रुबरू हुए.आर्टिस्ट सुमन फ्लेमिंग आर्ट की संस्थापक है जहां कई युवा आर्टिस्ट रोजगार प्राप्त कर रहे हैं.वहीं स्नेआ का अपना फैशन स्टूडियो ‘सिलुएट्स बाय स्नेआ’ है जिसके आज दस साल पूरे होने के उपलक्ष्य में फैशन शो का आयोजन हुआ..स्नेआ के फैशन स्टूडियो कम बुटीक में इंडियन, वेस्टर्न, ब्राइडल, प्री वेडिंग के कपड़े सारे कुछ डिजाइन किए और बनाए जाते हैं.एक पूरी टीम है जो यह काम करती है.
फैशन शो देखने आई मेहनाज ने कहा -”
हर कोई इंजीनियर या डाॅक्टर बने, कोई जरुरी नहीं..आर्ट का भी अपना बाजार है और इस क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं.बस एक्सपोजर मिलने की बात है.आज का फैशन शो बहुत ही शानदार था.”
मौके पर खास तौर से आमंत्रण वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता ने कहा कि सबको मिलकर एक ऐसा शहर बनाना है, जहां अपनी अपनी पसंद के विषयों में शिक्षा ग्रहण कर छात्र रोजगार के अवसर तलाशें,स्टार्ट अप करें, निखरें, थोपे हुए विषयों को साथ लिए वे बोझ की तरह न जिएं और न ही असफलता से फ्रस्ट्रेशन का शिकार बनें…
फ्लेमिंग आर्ट की संस्थापक और स्नेआ की मित्र सुमन प्रसाद ने इस मौके पर कहा कि एक स्टार्ट अप की संस्थापक होने के नाते उन्हें स्वयं इस बात का अनुभव है कि एक महिला को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.सुमन ने कहा कि महिला को आगे बढ़ाने में महिलाओं को सपोर्ट करना चाहिए.
फैशन डिजाइनर स्नेआ संधू ने इस मौके पर बताया कि दस साल की यह यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरी.एक समय सपने देखा करती थी और फिर सीमित संसाधनों से फैशन स्टूडियो की शुरुआत की. अब दस साल हो गए, यह सफलता सहनशीलता, समर्पण और क्रिएटिविटी के मिश्रण की कहानी है.
स्नेआ के बारे में
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2012 में, स्नेआ ने महाराष्ट्र के पुणे, एसएनडीटी के स्कूल ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी से फैशन में डिग्री ली.वह डॉक्टर बनने की इच्छा रखते थी, लेकिन ईश्वर की योजना कुछ और ही थी.18 साल की उम्र में पिताजी ने उन्हें एक सिलाई मशीन उपहार में दी थी, जिसके बाद स्नेआ ने खुद के सपने की पड़ताल की ..इस तरह फैशन की दुनिया में धीरे धीरे कदम रखा.गुड़ियों के कपड़े सिलने के आरम्भिक दिनों से लेकर आगे स्नेआ ने 2014 में *सिल्होउट्स बाय स्नेआ* की स्थापना की, जिसने अनूठे डिज़ाइन और कस्टम-मेड कपड़ों के साथ उनकी ब्रांड को परिभाषित किया. रास्ते में, उन्होंने महिला उद्यमी के लिए सामान्य चुनौतियों का सामना किया, लेकिन अपने परिवार के अटल समर्थन के साथ, उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया.आज, स्नेआ के ग्राहक देश-विदेश तक फैले हुए हैं जो उनकी डिजाइनिंग की प्रतिभा के कायल हैं.
शादी और एक बच्ची की मां बनने के बावजूद स्नेआ अपने व्यक्तिगत जीवन को अपने व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ संतुलित रखती हैं और महिलाओं को प्रेरित करती हैं कि वे अपने सपनों का पीछा करें.
दसवीं वर्षगांठ पर फैशन शो के माध्यम से स्नेआ ने अपना नवीनतम संग्रह प्रदर्शित किया.इस कार्यक्रम में स्नेआ के ग्राहक, आर्टिस्ट सुमन प्रसाद, सोशल मीडिया इनाफ्लुएंसर आतिफ हबीब और वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता ने शिरकत किया.
स्नेआ कहती हैं, “सिल्होउट्स बाय स्नेआ” सिर्फ एक ब्रांड नहीं है, बल्कि एक दर्शन है. मैं महिलाओं को सपनों में विश्वास करने और अपने प्रयासों में दृढ़ता से जारी रखने की शक्ति देना चाहती हूं. समर्पण और सतत प्रयास के साथ, सपने साकार होते हैं.”
फैशन स्टूडियो को कैसे फॉलो करें
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