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Home » Jamshedpur News:सूर्यमंदिर परिसर में संगीतमय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिन कथा व्यास पूज्य पंडित गौरांगी गौरी ने भगवान राम के बाल लीला का प्रसंग सुनाया
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Jamshedpur News:सूर्यमंदिर परिसर में संगीतमय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिन कथा व्यास पूज्य पंडित गौरांगी गौरी ने भगवान राम के बाल लीला का प्रसंग सुनाया

BJNN DeskBy BJNN DeskFebruary 26, 2024No Comments5 Mins Read
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जमशेदपुर। सिदगोड़ा सूर्य मंदिर कमिटी द्वारा श्रीराम मंदिर स्थापना के चतुर्थ वर्षगांठ के अवसर पर सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिन कथा प्रारंभ से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सूर्य मंदिर समिति के वरीय सदस्य एवं भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार सपत्नीक, भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रसाद सपत्नीक एवं सूर्य मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी प्रमोद मिश्रा सपत्नीक व अन्य ने व्यास पीठ एवं व्यास का विधिवत पूजन किया गया। पूजन पश्चात श्री अयोध्याधाम से पधारे मर्मज्ञ कथा वाचिका पूज्य पंडित गौरांगी गौरी जी का स्वागत किया गया। स्वागत के पश्चात कथा व्यास पंडित गौरांगी गौरी ने श्रीराम कथा के चतुर्थ दिन भगवान राम के बाल लीला के कथा का प्रसंग सुनाया।

व्यास पूज्य पंडित गौरांगी गौरी जी ने भगवान राम की सुंदर बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि बचपन से ही लक्ष्मण जी की राम जी के चरणों में प्रीति थी। और भरत और शत्रुघ्न दोनों भाइयों में स्वामी और सेवक की जिस प्रीति की प्रशंसा है, उनमें वैसी प्रीति हो गई। वैसे तो चारों ही पुत्र शील, रूप और गुण के धाम हैं लेकिन सुख के समुद्र श्री रामचन्द्रजी सबसे अधिक हैं। माँ कौशल्या कभी गोदी में लेकर भगवान को प्यार करती है। कभी सुंदर पालने में लिटाकर ‘प्यारे ललना!’ कहकर दुलार करती है, जो भगवान सर्वव्यापक, निरंजन (मायारहित), निर्गुण, विनोदरहित और अजन्मे ब्रह्म हैं, वो आज प्रेम और भक्ति के वश कौसल्याजी की गोद में खेल रहे हैं।

सुमधुर संगीत के बीच पुज्य गौरांगी गौरी जी ने बताया कि एक बार माता कौशल्या ने श्रीराम को स्नान और श्रृंगार करा कर झूला पर सुला दिया और स्वयं स्नान कर अपने कुलदेव की पूजा कर नैवेद्य भोग लगाकर पाक गृह गई। जब वह पुन: लौट कर पूजा स्थल पर आई तो उन्होंने देखा कि देवता को चढ़ाए गए नैवेद्य शिशुरूपी भगवान राम भोजन कर रहे हैं। जब उन्होंने झूला पर जाकर देखा तो वहां भी उन्होंने श्री राम को झूले पर सोते पाया। इस दृश्य को देखकर कौशल्या डर गई और कांपने लगी। माता की अवस्था देख श्री राम ने माता को अपना विराट रूप दिखाकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। भगवान का विराट रूप देखकर कौशल्या माता प्रफुल्लित हो उन के चरणों पर गिर पड़ी। बालरूप भगवान की भक्ति में देवता भी मगन थे। जिनका नाम सुनना ही शुभ है उनका साक्षात दर्शन का फल कौन प्राप्त करना नही चाहेगा?

कथाव्यास पंडित गौरांगी गौरी ने कहा कि जिस भगवान की गोद में ब्रह्माण्ड खेलता है, वह भगवान बालरूप में माता कौशल्या की गोद में खेलते हैं। जिनकी गोंद में दुनियाँ हँसती रोती है वे माता कौशल्या की गोद में कभी रोते हैं तो कभी हंसते है। भगवान की बाललीला अदभुत और मनमोहक है।

कथा में आगे वर्णन करते हुए पंडित गौरांगी गौरी जी कहते है कि आज भारत का बचपन नष्ट हो रहा है। बचपन नष्ट करने वाले कोई और नहीं, बल्कि उनके परिवार ही हैं। यदि बचा सके तो आज हम बच्चों के बचपन बचाएँ। बच्चे अपने परिवार की पाठशाला में ही सर्वप्रथम सीखतें हैं। हमारा पारिवारिक जीवन जैसा होगा, भावी पीढ़ी भी वैसी ही होगी। परिवार में जैसे संस्कार होगें, वैसा ही संस्कार बालक सीखता है। कथाव्यास कहते है कि यदि वृक्ष को हरा-भरा देखना है तो उसके मूल में पानी डालें, पत्ते सींचने से क्या होगा। अतः यदि देश में संस्कारवान पीढ़ी खड़ी करनी हो तो बच्चों के बचपन को संस्कारवान बनाया जाए।

आगे, कथा में महाराजा दशरथ के चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार सम्पूर्ण हुआ। महर्षि वशिष्टि द्वारा चारों पुत्रों का नामकरण और उनकी महिमा का उल्लेख कथा का केन्द्र बिन्दु बना और इसी के साथ कथा व्यास पंडित गौरांगी गौरी ने कथा को विस्तार देते हुए कथा को विश्वामित्र द्वारा भगवान राम के मांगे जाने की ओर वर्णित किया। अयोध्या नरेश राजा दशरथ के दरबार में विश्वामित्र राक्षसों के वध के लिए राम को मांगते है। महाराजा दशरथ विश्वामित्र के आने का कारण पूछते हुए कहते है- केहि कारण आगमन तुम्हारा, विश्वामित्र ने महाराजा दशरथ से कहा – अनुज समेत देहु रघुनाथा, निशिचर बधै मैं हो हुं सनाथा। महाराजा दशरथ ने तो यह माना था कि विश्वामित्र धन सम्पदा मांगने आये हैं परंतु उन्हें कहां पता था की एक ऋषि राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके प्राणों के प्रिय राजकुमारों को मांगने आये हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में संत धरती पर धर्म की रक्षा के लिए आते हैं, राष्ट्र की रक्षा के लिए आते हैं। संत परमात्मा की करूणा के अवतार हैं। संत चलते-फिरते साक्षात तीर्थ हैं। गुरु वशिष्ट के समझाने पर वे राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजते है। इस बहाने विश्वामित्र द्वारा अपनी तपस्या में प्राप्त सभी दिव्यास्त्रों को रामलक्ष्मण को सुपुर्द करते है। ताड़का का बध, मारिच से यज्ञ की रक्षा और अहिल्या का उद्धार पर कथा आगे की ओर बढ़ती है।

इस दौरान 5 सदस्यीय गायक मंडली भजन आदि सुना कर श्रद्धालुओं का मन मोह रहे थे। कथा में मंच संचालन सूर्य मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह राजा ने किया।

कल श्रीराम कथा के पंचम दिवस में प्रभु श्रीराम विवाह के प्रसंग का झांकी सहित वर्णन किया जाएगा। कथा दोपहर 3:30 बजे से प्रारंभ होती है।

कथा के दौरान सूर्य मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, राकेश्वर पांडेय, शंभु सिंह, संजय पलसानिया, जयप्रकाश राय, मुरारी लाल अग्रवाल, बबलू चौबे, हलदर नारायण साह, छक्कन चौधरी, दीपू सिंह, अनिल अग्रवाल, रामविलास शर्मा, अनूप सिंह, गोबु घोष, तजिंदर सिंह जॉनी, अमरजीत सिंह राजा, शैलेश गुप्ता, शशिकांत सिंह, रूबी झा, कृष्ण मोहन सिंह, बंटी अग्रवाल, प्रेम झा, प्रमोद मिश्रा, दिनेश कुमार, गुंजन यादव, राकेश सिंह, धर्मेंद्र प्रसाद, कुमार अभिषेक, मुकेश शर्मा, कौस्तव राय, मीरा झा, राकेश राय, अनिकेत सिंह, राहुल सिंह, अरुण कुमार, सतीश सिंह, ओम पोद्दार, समेत अन्य मौजूद रहे।

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आनंद किशोर बिहार झारखंड न्यूज़ नेटवर्क में कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे सामाजिक मुद्दों, जनहित और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि रखते हैं। आनंद का उद्देश्य कमजोर और जरूरतमंद लोगों की आवाज को सही मंच तक पहुंचाना है। वे निष्पक्ष, सरल और प्रभावशाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं।

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