
जमशेदपुर: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में छात्राओं को ड्रोन तकनीक से जोड़ने और इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने की दिशा में पहल की गई है। विश्वविद्यालय और ड्रोन वैन प्राइवेट लिमिटेड के बीच ड्रोन प्रशिक्षण एवं जागरूकता को लेकर समझौता ज्ञापन किया गया। यह पहल कुलपति प्रो. इला कुमार के मार्गदर्शन में की गई।
विश्वविद्यालय के अनुसार इस समझौते का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को ड्रोन तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें इससे जुड़े कौशल एवं करियर विकल्पों से परिचित कराना है। किसी भी संकाय की छात्राएं प्रस्तावित ड्रोन कोर्स में शामिल हो सकेंगी।
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कृषि से आपदा प्रबंधन तक ड्रोन का उपयोग
कार्यक्रम में दिल्ली से जुड़े कुलेश्वर ने ड्रोन तकनीक के विभिन्न उपयोगों की जानकारी दी। उन्हें कार्यक्रम में DGCA से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षक के रूप में परिचित कराया गया।
उन्होंने बताया कि ड्रोन का उपयोग कृषि, बाढ़, चक्रवात, भूकंप राहत कार्य, सुरक्षा, मैपिंग और निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। ऐसे स्थानों पर भी ड्रोन उपयोगी साबित हो सकते हैं, जहां सामान्य व्यक्ति के लिए पहुंचना मुश्किल होता है। बड़े पुलों और ऊंचाई वाले स्थानों की निगरानी तथा कैमरा आधारित कार्यों में भी ड्रोन के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में ड्रोन के विभिन्न प्रकारों और उनकी क्षमताओं के बारे में भी बताया गया। वहीं, ड्रोन संचालन के लिए लागू नियम और प्रमाणन संबंधित श्रेणी एवं उपयोग पर निर्भर करते हैं। DGCA के नियमों में कुछ श्रेणियों के लिए अलग प्रावधान हैं।
ड्रोन इंडस्ट्री में करियर की संभावनाएं
कुलेश्वर ने छात्राओं को ड्रोन क्षेत्र में उपलब्ध संभावित करियर विकल्पों के बारे में जानकारी देते हुए ड्रोन पायलट, ड्रोन इंजीनियर, एरियल डेटा एनालिस्ट और ड्रोन पायलट इंस्ट्रक्टर जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।
उन्होंने ड्रोन की संरचना, संचालन और प्रशिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी समझाया। कार्यक्रम में बताया गया कि कृषि समेत कई क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ ड्रोन आधारित सेवाओं की भूमिका बढ़ रही है।
DGCA के उपलब्ध रिकॉर्ड में Drone Van Private Limited का नाम ड्रोन प्रशिक्षण से संबंधित रिकॉर्ड में दर्ज है।
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अगले माह होगी ड्रोन पर कार्यशाला
विश्वविद्यालय के अनुसार समझौते के बाद छात्राओं को ड्रोन तकनीक के प्रति जागरूक करने के लिए अगले माह विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें ड्रोन के उपयोग, संचालन, तकनीकी पहलुओं और इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
कुलपति प्रो. इला कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक का महत्व बढ़ रहा है। छात्राओं को नई तकनीकों से जोड़कर उनके कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाना इस पहल का उद्देश्य है।
कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल और आधुनिक खेती से जुड़े विभिन्न सरकारी प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।
कुलसचिव ने दिया धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर डॉ. केया बनर्जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर ने दिया।
इस अवसर पर डॉ. मनीषा टाइटस, डॉ. सोनाली सिंह, पुष्पा कुमारी, डॉ. राजेंद्र जायसवाल, डॉ. सनातन दीप, डॉ. रत्ना मित्र, डॉ. अमृता कुमारी, डॉ. अनामिका, डॉ. संजय भुईया, डॉ. रितेश ठाकुर और डॉ. अनीता मिश्रा सहित विभिन्न संकायों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

