जमशेदपुर: विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय (Jamshedpur Women’s University) के बिष्टुपुर कैंपस में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक पहल की गई। शिक्षा संकाय (Faculty of Education) के बीपीएड (B.P.Ed) विभाग की छात्राओं ने माननीय कुलपति प्रो. इला कुमार के कुशल मार्गदर्शन में परिसर में न सिर्फ फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया, बल्कि तकनीक और कबाड़ के बेहतरीन इस्तेमाल (Best out of Waste) से प्रकृति प्रेम की एक शानदार मिसाल पेश की।
दिग्गजों ने किया पौधारोपण, दिया हरियाली का संदेश
पृथ्वी दिवस के इस खास मौके पर बी.पी.एड. के प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के फलदार एवं छायादार वृक्षों के पौधे उपलब्ध कराए। इन पौधों का रोपण विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों और शिक्षकों के हाथों पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुआ। पौधारोपण करने वालों में मुख्य रूप से विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू डॉ. किश्वर आरा, प्रॉक्टर डॉ. सुधीर कुमार साहू, कॉमर्स डीन डॉ. दीपा शरण, आईक्यूएसी (IQAC) डायरेक्टर डॉ. रत्ना मित्रा, स्पोर्ट्स एंड कल्चर के चेयरमैन डॉ. सनातन दीप, शिक्षा संकाय की को-ऑर्डिनेटर डॉ. कामिनी कुमारी, एनएसएस (NSS) को-ऑर्डिनेटर डॉ. गलोरिया पुर्ति, विभागाध्यक्ष डॉ. सजीत कुमार महतो, सहायक प्राध्यापक गोपाल चक्रवर्ती, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. सौरभ मंडल एवं सहायक कर्मचारी राज कुमार कुंकल शामिल रहे।
पौधों का डिजिटलीकरण: स्कैन करें QR कोड, मिलेगी पूरी जानकारी
इस पौधारोपण अभियान की सबसे खास बात इसका तकनीकी नवाचार (Digitization) रहा। छात्राओं ने रोपे गए सभी पौधों की पूरी जानकारी (जैसे- वानस्पतिक नाम, प्रजाति, गुण और उपयोगिता) जुटाकर उनका डिजिटलीकरण किया है। इन जानकारियों को एक ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) में रूपांतरित कर पौधों के पास लगाया गया है। अब कोई भी छात्र या आगंतुक अपने स्मार्टफोन से इस क्यूआर कोड को स्कैन कर उस पौधे के बारे में तुरंत विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
प्लास्टिक कचरे से बेजुबान पक्षियों के लिए बनाए घोंसले
पर्यावरण को प्लास्टिक के नुकसान से बचाने और बेजुबान पक्षियों की देखभाल के लिए बी.पी.एड. की छात्राओं ने एक और बेहद संवेदनशील कदम उठाया। छात्राओं ने बेकार पड़े प्लास्टिक के डिब्बों, बोतलों और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं का सदुपयोग करते हुए पक्षियों के लिए सुंदर घोंसले, पीने के पानी के बर्तन और अनाज के लिए फीडर (Bird Feeders) बनाए। इन सभी को विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न पेड़ों पर सुरक्षित तरीके से स्थापित कर दिया गया है, ताकि भीषण गर्मी के इस मौसम में पक्षी आसानी से दाना-पानी ग्रहण कर सकें और उन्हें सुरक्षित आश्रय मिल सके।






