
जमशेदपुर: मशहूर उर्दू कहानीकार (Urdu Storyteller) और सफल प्रशासक रहे डॉ. मंज़र काज़मी (Dr. Manzar Kazmi) की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार (12 अगस्त 2026) को लौहनगरी के करीम सिटी कॉलेज (Karim City College), साकची में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कॉलेज के उर्दू पोस्टग्रेजुएट डिपार्टमेंट (Urdu PG Department) द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में विभाग के सभी प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मंज़र काज़मी के सुपुत्र और इसी कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. तनवीर जमाल काज़मी उपस्थित रहे। इस दौरान कॉलेज के विकास और उर्दू साहित्य (Urdu Literature) में डॉ. काज़मी के अमूल्य योगदान को भावपूर्ण तरीके से याद किया गया।


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कुरान की तिलावत से शुरुआत, डॉ. अंसारी ने कराया परिचय
कार्यक्रम की शुरुआत छात्रा सबीहा फिरदौस द्वारा तिलावत-ए-कुरान (Quran Recitation) के साथ हुई। इसके पश्चात उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. शहबाज़ अंसारी ने विषय प्रवेश कराते हुए डॉ. मंज़र काज़मी के व्यक्तित्व और कृतित्व का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। साथ ही, उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर जमाल काज़मी का पुष्पगुच्छ देकर गर्मजोशी से स्वागत किया।
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‘लक्ष्मण रेखा’ और सफल प्रशासन के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर जमाल काज़मी ने सभा को संबोधित करते हुए अपने पिता से जुड़ी कई अनमोल यादें साझा कीं।
साहित्यिक योगदान: उन्होंने बताया कि डॉ. मंज़र काज़मी एक जाने-माने उर्दू कहानीकार थे। उनकी मशहूर किताब “लक्ष्मण रेखा” और उर्दू साहित्य में उनके द्वारा रची गई अनमोल कहानियों में जीवन का साफ नज़रिया और रोचक भाषा (Interesting Language) झलकती है।
सफल प्रशासक: डॉ. तनवीर ने कहा कि एक बेहतरीन लेखक होने के साथ-साथ वे एक बेहद सफल प्रशासक भी थे। करीम सिटी कॉलेज के प्रिंसिपल (Principal) रहते हुए उन्होंने कॉलेज के विकास और प्रगति को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं, जिसके लिए उन्हें हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
प्राध्यापकों ने डाला रचनाओं पर प्रकाश
मुख्य अतिथि के संबोधन के बाद विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मुहम्मद ईसा (गौहर अज़ीज़) और डॉ. सादिक इक़बाल ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, पूर्व प्राचार्य और महान कहानीकार डॉ. मंज़र काज़मी के जीवन, उनके संघर्षों और उनकी कालजयी रचनाओं (Timeless Compositions) पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. काज़मी का साहित्य आज भी युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम करता है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सादिक इक़बाल ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद (Vote of Thanks) ज्ञापन किया।



