
Anni Amrita
जमशेदपुर.
जमशेदपुर में दुर्गा पूजा की धूम पूरे शहर में रहती है, लेकिन एग्रिको इलाके के एक क्वार्टर में बीते 17 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है, जो सामाजिक समावेश और श्रद्धा की मिसाल है. यहां ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ी अमरजीत गिल(वैष्णव किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर हैं) पूरी आस्था और विधि-विधान से नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करती हैं.
अमरजीत न सिर्फ पूजा का आयोजन करती हैं, बल्कि मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्वयं तैयार करती हैं. वे मिट्टी विशेष रूप से कोलकाता की गंगा नदी के तट से लाती हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि यही मिट्टी देवी की मूर्ति के लिए सबसे शुभ होती है. वे मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी बनाती हैं और उन्हें रंगने का कार्य भी खुद ही करती हैं. इन मूर्तियों की शोभा देखते ही बनती है.
पूरे नौ दिन उपवास, शाम को होती है संध्या आरती
अमरजीत नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना से लेकर व्रत और पूजा तक का संकल्प लेती हैं. नवरात्रि के हर दिन शाम 6:30 बजे संध्या आरती होती है, जिसमें आसपास के लोग और ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य भी शामिल होते हैं. पूजा सात्विक होती है और माहौल पूरी तरह धार्मिक रहता है.
पूजा के अंतिम दिन ट्रांसजेंडर समुदाय का होता है भव्य मिलन
नवरात्रि के अंतिम दिन अमरजीत ट्रांसजेंडर समुदाय के सभी लोगों को आमंत्रित करती हैं. इस दिन विशेष रूप से सिंदूर खेला का आयोजन होता है, जिसमें सभी एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं देते हैं. यह क्षण सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और अपनत्व का प्रतीक भी बन जाता है.
हर समाज के लोग लेते हैं भाग
अमरजीत की इस पूजा में सिर्फ ट्रांसजेंडर समुदाय ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य वर्गों के लोग भी श्रद्धा से शामिल होते हैं. यह आयोजन वर्ष दर वर्ष समाज के सभी वर्गों के बीच समरसता, स्वीकृति और भक्ति का एक उदाहरण बनता जा रहा है.



