जमशेदपुर: शहर के टाटानगर रेलवे स्टेशन पार्किंग टेंडर को लेकर इन दिनों कई तरह की अफवाहें और चर्चाएं बाजार में गर्म हैं। हाल ही में यह खबर फैलाई गई थी कि ठेकेदार द्वारा रेलवे का बकाया भुगतान न करने के कारण पार्किंग का टेंडर रद्द कर दिया गया है। अब इस पूरे विवाद पर रेलवे पार्किंग के ठेकेदार राजीव राम ने सामने आकर कड़ा जवाब दिया है और इन सभी खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार बताया है।
विवाद की जड़ और अफवाहों का बाजार पिछले कुछ दिनों से शहर में यह चर्चा जोरों पर थी कि आर्थिक तंगी के चलते ठेकेदार रेलवे को पैसे नहीं दे पा रहे थे, जिसके कारण विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए टेंडर रद्द कर दिया। लेकिन राजीव राम ने इन दावों की पोल खोलते हुए स्पष्ट किया है कि टेंडर रद्द होने की मुख्य वजह कोई बकाया नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से उनका अपना व्यक्तिगत और व्यावसायिक निर्णय था।
‘सभी बकाया और बिलों का हुआ है समय पर भुगतान’ राजीव राम ने अपनी सफाई में पारदर्शिता के साथ बताया कि उन्होंने रेलवे को दी जाने वाली लाइसेंस फीस, बिजली का बिल और एमडी मनी (MD Money) सहित सभी प्रकार के अनिवार्य भुगतानों को समय सीमा के भीतर और नियमित रूप से जमा किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले करीब 9 महीनों तक उन्होंने पार्किंग व्यवस्था का सुचारू रूप से संचालन किया है। रेलवे जैसे बड़े सरकारी विभाग में बिना भुगतान किए 9 महीने तक किसी भी टेंडर को चलाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से बिल्कुल असंभव है।
असामाजिक तत्वों पर लगाया छवि खराब करने का आरोप ठेकेदार राजीव राम का मानना है कि कुछ असामाजिक तत्व और उनके विरोधी जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर साबित करने के लिए यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि वे टेंडर चलाने में सक्षम नहीं थे।
विरोधियों को 1 से 5 करोड़ रुपये का खुला चैलेंज इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात राजीव राम का वह खुला चैलेंज है, जिसने सबको चौंका दिया है। उन्होंने अपने विरोधियों और अफवाह फैलाने वालों को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि कोई भी व्यक्ति रेलवे के किसी भी अधिकारी से यह लिखित प्रमाण लाकर दिखा दे कि टेंडर ‘भुगतान न करने के कारण’ रद्द हुआ है, तो वह उस व्यक्ति को 1 करोड़ रुपये का नकद इनाम देंगे। बात यहीं खत्म नहीं हुई; उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि रेलवे ने उनसे यह टेंडर ‘छीना’ है, तो वे 5 करोड़ रुपये तक देने के लिए तैयार हैं।
आखिर क्यों छोड़ा टेंडर? सामने आई असली वजह टेंडर छोड़ने के पीछे का असली कारण बताते हुए राजीव राम ने कहा कि इस पार्किंग संचालन में उन्हें प्रतिदिन 20 से 25 हजार रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। 9 महीनों के कार्यकाल में उन्हें कुल मिलाकर 30 से 40 लाख रुपये तक का आर्थिक घाटा हो चुका था। लगातार हो रहे इस भारी घाटे को देखते हुए ही उन्होंने स्वेच्छा (अपनी मर्जी) से टेंडर सरेंडर करने का फैसला किया।



