
Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का मंगलवार को भव्य समापन हो गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन हवन यज्ञ और पूर्णाहुति का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पुरोहित सीताराम शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना से लेकर समापन तक के सभी अनुष्ठान संपन्न कराए। भक्तों ने यज्ञ मंडप और व्यासपीठ की परिक्रमा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। समापन के बाद विशाल भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।

मनुष्य के जीवन में मित्रता की अहम भूमिका: सीताराम शास्त्री
कथा वाचक सीताराम शास्त्री ने धर्म, सत्य और कलयुग की महिमा का वर्णन करते हुए कृष्ण-सुदामा की दिव्य मित्रता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहाँ सच्ची मित्रता होती है, वहाँ स्वार्थ या मतलब के लिए कोई जगह नहीं होती। आज के आधुनिक युग में मनुष्यों को श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज कलयुग में लोग अपने ही मित्रों को धोखा दे देते हैं, जो कि धर्म के विरुद्ध है।
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सुदामा के दो मुट्ठी चावल और दो लोकों का राज
कथा के दौरान सीताराम शास्त्री ने सुदामा के दरिद्रता के रहस्य को उजागर किया। उन्होंने बताया कि सुदामा ने अनजाने में भगवान कृष्ण के हिस्से के चने खा लिए थे, जिसके कारण उन्हें घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ा। बाद में, पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर सुदामा एक छोटी सी पोटली में कच्चे चावल लेकर द्वारिकाधीश से मिलने पहुंचे। जब कृष्ण ने उस पोटली से प्रेमपूर्वक दो मुट्ठी चावल खाए, तो सुदामा को दो लोकों का स्वामी बना दिया। इस भावुक प्रसंग को सुनकर पंडाल में उपस्थित सभी भक्त भाव-विभोर हो उठे।
कलयुग की महिमा और भगवान कृष्ण का स्वधाम गमन
महाराज ने भागवत पुराण के संदर्भ से बताया कि कलयुग में केवल भगवान का नाम ही समस्त पापों से मुक्ति दिलाने का एकमात्र साधन है। कलयुग में ऐसे शासक होंगे जिनका कोई धर्म नहीं होगा। कथा के अंतिम चरण में उन्होंने श्रीकृष्ण द्वारा उद्धव को 24 गुरुओं की कथा सुनाने और द्वारका के समुद्र में डूबने का प्रसंग सुनाया। कृष्ण के स्वधाम गमन के साथ ही पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हुआ।
इस सात दिवसीय धार्मिक महोत्सव को सफल बनाने में विभा दुदानी, मंजू खंडेलवाल, बीना अग्रवाल, मंजू मुसद्दी, सुशीला अग्रवाल, कृष्णा अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल, मीरा अग्रवाल, निर्मला अग्रवाल, कुमकुम अग्रवाल, मीरा खेमका, विनीता मस्करा, सरिता अग्रवाल, रजनी मित्तल, रुक्मणी खेमका, शांति गोयनका, मंजू आगीवाल, सरिता कटारका समेत सोनारी भजन संध्या की महिलाओं का सराहनीय योगदान रहा।
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