हिमांशु महाराज ने प्रेम ही ईश्वर है का दिया संदेश
जमशेदपुर। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मंगल अवसर पर बिष्टुपुर सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ मंगलवार 01 सितम्बर से शुरू हुआ, जो सोमवार 07 सितम्बर तक चलेगा। भागवत कथा कार्यक्रम के प्रथम दिन मंगलवार को स्वामी हिमांशु जी महाराज ने भागवत का उपसंहार क्या कहता है पर परिचर्चा करते हुए कहा कि इस जीवन को जीने की कला का माध्यम किस प्रकार ठाकुर जी के चरणों में लगेगी एवं मानव कल्याण के लिए ये भागवत इनको आदेश देती है कि अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर जो ले जाती है उसे हम भागवत कहते है।
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भागवत में ज्ञान बरैग जो भक्ति के दो पुत्र है, उनका उद्धार होता है एवं गो-करण के भाई धुधंकारी महादैत्य का उद्धार होता है। इसके पश्चात भगवान नारायण बिष्णु के 24 अवतारों का वर्णन महाराज जी ने सुनाया। इसके पश्चात कथा श्रवण करने की विधि श्री भागवत के श्लोक में वर्णित है। भागवत के जो रचितकार वेदव्यास के पुत्र सुखदेव जो कि भगवान शंकर के अवतार है, उनके जन्म की कथा महाराज जी ने सुनायी, जिसका सारांश हैं-प्रेम ही ईश्वर है। हरि व्यापक सर्वत्र सामाना, प्रेम से प्रगट होये में जाना। इससे पहले मंगलवार की सुबह विधिवत् रूप से भागवत की पूजा अर्चना के साथ कलश स्थापना की गयी। लगातार जमकर हो रही बारिश के बीच सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर से गाजे-बाजे के साथ शोभा यात्रा निकाली, जो बिष्टुपुर मेन रोड़ स्थित श्रीराम मंदिर तक गयी।
प्रथम दिन मंगलवार को यजमान के रूप में श्याम संुदर नागेलिया, सत्यनारायण नरेड़ी, ओमप्रकाश मुनका, उमेश संघी, ओमप्रकाश गुप्ता, सुनीता-सुरेश नरेड़ी एवं बिहारी लाल शर्मा मौजूद थे। प्रसाद के यजमान मोतीलाल जगदीश खेमका, विजय मूनका, नाथुलाल पोदार, गोविन्द राम मुरलीधर, विजय नागेलिया थे। इस मौके पर प्रमुख रूप से मंदिर कमिटी के सचिव सुरेश अगीवाल, अशोक कुमार नरेड़ी, कुंजबिहारी नागेलिया, किशन संघी, जगदीश खेमका समेत सैकड़ों की संख्या में भक्तगण शामिल थे।


