
जमशेदपुर, 24 अक्टूबर 2026। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित बुरूडीह गांव में शनिवार को ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ (MDT) 100 दिवसीय कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान के तहत रात्रि चौपाल आयोजित की गई। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को कुष्ठ रोग के लक्षण, उपचार, इससे जुड़े मिथकों और दिव्यांगता से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
अभियान का उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और लक्षण दिखने पर समय पर जांच एवं इलाज के लिए लोगों को प्रेरित करना है। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि कुष्ठ रोग बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। इसका इलाज सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में नि:शुल्क उपलब्ध है।
दाग में सुनापन दिखे तो कराएं जांच
सानग्राम पंचायत के मुखिया संजय सरदार ने ग्रामीणों से अपील की कि शरीर पर किसी दाग के साथ निश्चित रूप से सुनापन महसूस हो, तो चिकित्सक से परामर्श लें। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग न तो अभिशाप है और न ही पिछले जन्म का पाप। समय पर रोग की पहचान और उपचार शुरू होने से दिव्यांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है।
एमपीडब्ल्यू उपेन्द्रनाथ मोदिना ने ग्रामीणों को ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ अभियान के तहत चल रही जागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी। यह अभियान 10 अक्टूबर 2026 से 30 जनवरी 2027 तक चलाया जा रहा है।
मिथकों और दिव्यांगता से बचाव की दी जानकारी
कार्यक्रम में पंचायत के उपमुखिया पदो हंसदा ने कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और इसके कारण होने वाली दिव्यांगता के बारे में बताया। वहीं, एमपीडब्ल्यू तुषार मंडल ने सेल्फ केयर यानी स्वयं की देखभाल के महत्व को समझाया।
उन्होंने रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि कुछ मामलों में सर्जरी के माध्यम से कुष्ठ रोग से संबंधित विकृतियों और दिव्यांगता को ठीक करने या कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने सहियाओं को कुष्ठ रोग विभाग की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के संबंध में भी जानकारी दी।
स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीणों ने निभाई भागीदारी
बुरूडीह गांव में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में पीरामल फाउंडेशन के शशि भूषण, एमटीएस सुनील तिर्की, एमपीडब्ल्यू उपेन्द्रनाथ मोदिना, संजय सरदार, देवाशीष भगत, पलास मंडल, दीपांकर, तुषार मंडल, लैब टेक्नीशियन अंबुज गोप, सहियाओं और ग्रामीणों का योगदान रहा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को संदेश दिया गया कि कुष्ठ रोग के लक्षणों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और उपचार कराना चाहिए। जागरूकता और सही इलाज से रोग से जुड़ा भेदभाव कम करने तथा दिव्यांगता से बचाव में मदद मिल सकती है।

