जमशेदपुर। महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। बिष्टुपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय (तिलक पुस्तकालय) में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में मानगो की मेयर सुधा गुप्ता ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को देश की आधी आबादी के साथ ‘राजनीतिक धोखा’ करार दिया है। भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए मेयर ने सीधी चुनौती दी कि यदि केंद्र सरकार और भाजपा वास्तव में महिला हितैषी हैं, तो उन्हें तुरंत एक महिला प्रधानमंत्री की घोषणा करनी चाहिए।
‘अधिकार नहीं, इंतजार कराने का कानून है’
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुधा गुप्ता ने कड़े शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं को गुमराह करने की राजनीति अब पूरी तरह से उजागर हो चुकी है। जिस बिल को जोर-शोर से महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया गया था, उसे जानबूझकर ऐसी तकनीकी शर्तों में जकड़ दिया गया है कि उसका लागू होना वर्षों तक टल जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार की नीयत वास्तव में साफ होती, तो महिला आरक्षण आज से ही लागू हो जाता, लेकिन इसे परिसीमन के जाल में फंसाकर लटका दिया गया है।
मेयर सुधा गुप्ता ने सामने रखे ये 5 कड़वे तथ्य:
अपनी बातों को पुख्ता करने के लिए मेयर सुधा गुप्ता ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और बिंदु मीडिया के सामने रखे:
कानून बना, लेकिन लागू नहीं: 2023 में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान संसद से पारित तो हो गया, लेकिन इसे तुरंत लागू करने के बजाय आगे की जटिल प्रक्रियाओं से जोड़ दिया गया।
जनगणना और परिसीमन की शर्त: कानून में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन (Delimitation) कराना जरूरी होगा। चूंकि अभी तक नई जनगणना ही शुरू नहीं हुई है, इसलिए आरक्षण स्वतः ही टल गया है।
2029 या उसके बाद तक का इंतजार: मौजूदा तकनीकी और कानूनी स्थिति को देखते हुए यह आरक्षण अगले लोकसभा चुनाव (2029) के बाद ही लागू होने की संभावना है। इसका सीधा अर्थ है कि महिलाओं को उनके अधिकार के लिए कम से कम 5 से 6 साल का और इंतजार करना पड़ेगा।
विपक्ष की मांग को किया गया दरकिनार: विपक्ष ने संसद में मजबूती से यह मांग रखी थी कि बिना परिसीमन के मौजूदा सीटों पर ही तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने इस जायज मांग को स्वीकार नहीं किया।
राजनीतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा: परिसीमन के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या तथा सीमाएं बदलेंगी। इससे कई राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संतुलन पर व्यापक असर पड़ सकता है, जिस पर विपक्ष ने गंभीर चिंता जताई है।
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झारखण्ड कांग्रेस और मेयर की प्रमुख मांगें
सुधा गुप्ता ने केंद्र सरकार के समक्ष कांग्रेस पार्टी की ओर से स्पष्ट मांगें रखीं:
महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त और देरी के तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
जनगणना और परिसीमन का बहाना बनाकर महिलाओं के अधिकारों को टालना तत्काल बंद किया जाए।
नई जनगणना के साथ-साथ, 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए भी आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान लागू किया जाए।
सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी
मेयर ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि देश की महिलाएं अब पूरी तरह से जागरूक हो चुकी हैं। वे यह भली-भांति समझ चुकी हैं कि उनके अधिकारों के साथ केवल राजनीति हो रही है। यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो महिलाओं के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक एक उग्र और व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।





