जमशेदपुर: नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करीम सिटी कॉलेज के मानगो कैंपस में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षिक समागम के दूसरे दिन शिक्षाविदों ने झारखंड में उच्च शिक्षा की दशा और दिशा को सुधारने के लिए कई अहम सुझाव साझा किए। शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों में आधुनिक तकनीकी और नैतिक शिक्षा के समावेश पर विशेष जोर दिया गया।
तकनीकी सत्र में नवाचार और शिक्षा सुधारों पर गंभीर मंथन
संगोष्ठी के दूसरे दिन की शुरुआत तकनीकी सत्र के साथ हुई, जिसमें मुख्य रूप से शोध पत्र प्रस्तुतियों (Research Paper Presentations) पर ध्यान केंद्रित किया गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने नई शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षण पद्धतियों में नवाचार और संरचनात्मक सुधारों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा देना अनिवार्य है।
झारखंड को है योग्य शिक्षकों की जरूरत: डॉ. विभा पांडेय
दोपहर 2:00 बजे आयोजित समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद (JSHEC), रांची की उप निदेशक डॉ. विभा पांडेय उपस्थित रहीं। उन्होंने उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
वित्तीय सहायता: डॉ. विभा पांडेय ने कहा कि अप्रैल महीने से शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े स्तर पर वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी।
फेलोशिप और स्कॉलरशिप: उन्होंने उच्चतर शिक्षा प्राप्त कर रहे मेधावी छात्रों और शोधार्थियों को फेलोशिप और स्कॉलरशिप देने की योजना पर प्रकाश डाला।
शिक्षक प्रशिक्षण: उन्होंने बी.एड (B.Ed) शिक्षा को सुदृढ़ करने की बात कही, क्योंकि झारखंड को वर्तमान में अच्छी गुणवत्ता वाले शिक्षकों की भारी आवश्यकता है।
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नैक (NAAC) मान्यता और गुणवत्ता मानक पर चर्चा
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. अमूल्य कुमार आचार्य (प्रमुख, स्नातकोत्तर शिक्षा विभाग, फकीर मोहन विश्वविद्यालय, बालासोर) ने कॉलेजों के लिए नैक (NAAC) मान्यता की महत्ता पर विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे नैक ग्रेडिंग किसी संस्थान की वैश्विक साख और शिक्षा की गुणवत्ता को निर्धारित करती है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज़ ने स्वागत भाषण दिया, जबकि सह-संयोजक डॉ. सत्या झा ने दो दिनों तक चली संगोष्ठी का सारांश प्रस्तुत किया।
प्रतिभागियों को मिला सम्मान, राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र (Certificates) वितरित किए गए। संगोष्ठी को सफल बनाने में तकनीकी सत्र के सभापतियों—डॉ. मोज़्ज़मीं नज़री, डॉ. जकी अख्तर, डॉ. संजय भूयान, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. शहला जबीन, डॉ. मो. इरशाद खान, डॉ. मो. मोइज अशरफ और डॉ. जूही समर्पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
मंच संचालन डॉ. बीना कुमारी और प्रो. सुबुही रहमान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रितु राज तिग्गा द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का औपचारिक समापन गौरवमयी राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस सफल आयोजन के पीछे कन्वेनर डॉ. परवीन उस्मानी और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सुचेता भुइयां की सक्रिय भूमिका रही।






