

जमशेदपुर.


जमशेदपुर के साकची स्थित ऐतिहासिक एवं बहुप्रतिष्ठित, सांस्कृतिक धरोहर बंगाल क्लब के सभागार में दिवंगत दिलीप भट्टाचार्य की स्मृति में ” स्मृति सभा ” का आयोजन हुआ जिसमें उनके परिजनों और शहरवासियों ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी.
दिवंगत दिलीप भट्टाचार्या के बारे में
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2 जनवरी 1942 को जन्मे दिलीप भट्टाचार्य ने अपनी स्कूली शिक्षा की मध्यप्रदेश से शुरूआत की थी.आगे की पढ़ाई बेगालीटोला इन्टरमीडिएट कालेज से की और उसके बाद पढ़ाई जारी रखते हुए उच्च शिक्षा बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी से पूरी की. युवावस्था में एक तेज तर्रार छवि रखने वाले दिलीप दा ने शुरुआती दौर में नौकरी करते हुए अपना भाग्य आजमाया. परंतु अपने बलबूते कुछ करने का जज्बा एवं सामाजिक कार्यों में उनकी रुचि उन्हें व्यवसायिक जगत में लेकर आई. व्यवसायिक जगत में प्रवेश करते ही उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंत तक एक सफल व्यवसायी के रूप में सफलता हासिल की. व्यवसाय के साथ-साथ जमशेदपुर के कई सामाजिक प्रतिष्ठान जैसे निखिल भारत बंग साहित्य, विहार बंगाली समिति, अन्वेशा, आननदोमय पाठ चक्र, प्रतीक संघर्ष फाउंडेशन, बंगाल क्लब और ऐसे कई संस्थाओं के साथ जुड़कर सामाजिक कार्य करते रहे. समाजसेवी अल्पना भट्टाचार्य के रुप में उन्हें एक अनमोल जीवनसंगिनी का साथ मिला जिनका दिलीप दा बखूबी गुणगान किया करते थे. सुपुत्र समुद्र एवं सुपुत्री हिमीका उनके दिल में बसते थे और कहीं ना कहीं उन्हें पुत्रवधू के रूप में भी एक बेटी से भी बढ़कर एक बेटी मिली. हमेशा अपने परिवार को एक मजबूत बंधन में बांधे रखते. इसी प्यार ने बेटा और बेटी को आज एक होनहार और सफल इंसान बनाया. जिसके चलते दिलीप दा हमेशा अपने आप में गर्व महसूस करते थे. बहुत ही सुखद जीवन व्यतीत हो रहा था. परन्तु कहते है न कि नियति के आगे किसी की नहीं चलती. यह तो ईश्वर का आशीर्वाद ही कहलाएगा कि 13वर्ष पहले जिनका 90प्रतिशत हार्ट ब्लाॅकेज हुआ हो उन्होंने एक फाइटर की तरह 13 वर्षों का सफर हंसते हंसते गुजार दिए. परन्तु नियति को ज्यादा दिनों तक यह रास नहीं आया और वह काला समय आ गया, जब 8 जनवरी 2024 को शरीर जाने को व्याकुल होने लगा. अन्ततः स्थानीय टाटा मुख्य अस्पताल में इलाजरत हुए. अबतक तो सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था. एक रीयल फाइटर की तरह जंग लड़े जा रहे थे. परन्तु 82 बर्ष की उम्र में शरीर साथ छोड़ रहा था. फिर भी हार मानने को तैयार नहीं थे. क्योंकि परिवार का साथ था. परिवार के सभी सदस्यों ने उनके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी.अंततः उन्हें टाटा मुख्य अस्पताल से विशेष विमान यानी एयर एम्बुलेंस सेवा के जरिए दिल्ली अपेलो अस्पताल में भर्ती करवाया. आखिरकार पीड़ादायक दुखद समय आया सबके के हरदिल अजीज रहे दिलीप भट्टाचार्य ने 6 फरवरी 2024 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया.
शुक्रवार की देर शाम बंगाल क्लब के सभागार में जमशेदपुर के कई गणमान्य समाजसेवियों, शुभचिंतकों और अन्य लोगों ने अश्रुपूर्ण आंखों से शत-शत नमन करते हुए दिलीप दा को श्रद्धांजलि अर्पित किया. किसी ने संगीत के जरिए तो किसी ने अपने अपने विचारों से हरदिल अजीज दिलीप दा के साथ बिताए पलों को याद किया.


