जमशेदपुर।
होल्डिंग टैक्स में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि से जनता पर बोझ झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर) की दरों में अचानक की गई भारी बढ़ोतरी ने स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए सर्किल रेट और सड़क की चौड़ाई पर आधारित फॉर्मूले के तहत होल्डिंग टैक्स में 15 से 20 प्रतिशत तक का भारी इजाफा किया गया है। इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भाजपा नेता और वार्ड पार्षद अनिल मोदी ने इसे पूरी तरह से अतार्किक और न्याय संगत नहीं बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा समय में, जब आम जनता पहले ही महंगाई से जूझ रही है, तब इस तरह टैक्स बढ़ाना आम आदमी की कमर तोड़ने वाला और एक जनविरोधी कदम है।
मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव, फिर टैक्स क्यों? अनिल मोदी ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जुगसलाई क्षेत्र में आज भी नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्र में पक्की सड़कों, सुव्यवस्थित नाली, जल निकासी की सही व्यवस्था, नियमित साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की स्थिति बेहद निराशाजनक और असंतोषजनक है। उन्होंने तर्क दिया कि जब प्रशासन जनता को बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया कराने में विफल साबित हो रहा है, तो ऐसे में बिना सुविधाओं में सुधार किए टैक्स का बोझ लादना पूरी तरह से अनुचित है। जनता को जो सुविधाएं मिल ही नहीं रही हैं, उसका टैक्स वसूलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
लोकेशन आधारित टैक्स फॉर्मूले से छोटे व्यापारियों को नुकसान होल्डिंग टैक्स के नए निर्धारण फॉर्मूले की खामियों को उजागर करते हुए अनिल मोदी ने कहा कि एक ही आकार और समान क्षेत्रफल वाले मकानों पर केवल ‘लोकेशन’ (स्थान) और सड़क की चौड़ाई के आधार पर अलग-अलग टैक्स लगाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है। जुगसलाई एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, और इस तरह के अव्यावहारिक कर निर्धारण से यहां के मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। यह नीति सीधे तौर पर उन लोगों को प्रभावित करेगी जो छोटे-मोटे व्यवसाय से अपनी आजीविका चलाते हैं।
निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनदेखी और फैसले पर पुनर्विचार की मांग भाजपा नेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रदेश में नगर निकाय के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और सभी निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि अपना पदभार संभाल चुके हैं। ऐसे में, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत कर निर्धारण और क्षेत्र के विकास से जुड़े किसी भी बड़े नीतिगत फैसले को निर्वाचित प्रतिनिधियों की सहमति के बिना लागू करना न्यायोचित नहीं है। अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से लिए गए इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए, अनिल मोदी ने झारखंड सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी के इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।




