
जमशेदपुर, 2 जून.

जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की पूर्व अध्यक्ष एवं लोकप्रिय शिक्षाविद् डॉ. चंद्रप्रभा पाठक का निधन हो गया है. वे पिछले लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उन्होंने 28 मई की सुबह अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है.
लौहनगरी जमशेदपुर में ही जन्मी और प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाली डॉ. पाठक के पति दुर्गा दत्त पाठक टाटा स्टील के वरिष्ठ पदाधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में जमशेदपुर में ही निवास कर रहे हैं.
पटना वीमेंस कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन की थीं संस्थापक अध्यक्ष
डॉ. चंद्रप्रभा पाठक पटना वीमेंस कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन, जमशेदपुर की संस्थापक अध्यक्ष व सक्रिय सदस्य थीं. अपनी कर्मनिष्ठा, दूरदर्शिता और अद्भुत संगठन क्षमता के बल पर उन्होंने इस संस्था को एक विशिष्ट पहचान दिलाई. पटना वीमेंस कॉलेज की पूर्व छात्राओं को एक सूत्र में पिरोने का मुख्य श्रेय उन्हें ही जाता है. उनके नेतृत्व में स्थापित यह संगठन आज भी समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है.
सहयोगियों और करीबियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
डॉ. पाठक के निधन पर पटना वीमेंस कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन के सदस्यों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें याद किया:
डॉ. जूही समर्पिता (सक्रिय सदस्य):
“डॉ. चंद्रप्रभा पाठक मनोविज्ञान की विदुषी होने के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को गहराई से समझती थीं. वे सभी सदस्यों को स्नेह के अटूट बंधन में बांधे रखती थीं और निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करती थीं.”
विद्या तिवारी (अध्यक्ष):
“चंद्रा दीदी की जगह कोई नहीं ले सकता. वे अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने वाली कर्मठ महिला थीं. वे जो संकल्प लेती थीं, उसे पूरा करके ही दिखाती थीं. उनके नेतृत्व में संस्था ने नई ऊंचाइयों को छुआ.”
आशा सिन्हा:
उन्होंने अश्रुपूरित नेत्रों से कहा, “हम सभी उनके स्नेह और मार्गदर्शन के बंधन में बंधे हुए हैं. उनका जाना संस्था के लिए एक अपूरणीय क्षति है. हम सब उन्हें अपनी स्मरणांजलि अर्पित करते हैं.”
रुबी सिन्हा:
“यद्यपि चंद्रा दीदी हम सबसे वरिष्ठ थीं, किंतु पटना वीमेंस कॉलेज से प्राप्त संस्कारों और मूल्यों ने हम सबको इस प्रकार जोड़े रखा कि पीढ़ियों का अंतर कभी महसूस ही नहीं हुआ.”
शिल्पी सिन्हा:
“चंद्रा दी की विरासत और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाना ही अब हम सभी का सच्चा दायित्व है.”
छोड़ गईं मूल्यों की समृद्ध विरासत
डॉ. चंद्रप्रभा पाठक अपने पीछे सेवा, स्नेह, कुशल नेतृत्व और मानवीय मूल्यों की एक समृद्ध विरासत छोड़ गई हैं. उनके शोक संतप्त परिवार में उनके पति के अलावा उनकी दो बेटियां और दो बहनें—श्रीमती शुभ्रा द्विवेदी एवं श्रीमती विजया चतुर्वेदी हैं (जो स्वयं भी पटना वीमेंस कॉलेज की पूर्व छात्राएं रही हैं).
पटना वीमेंस कॉलेज एलुमनाई एसोसिएशन, जमशेदपुर परिवार ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है


