
जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन में कुलदेवी महासर माता का पंचम वार्षिक उत्सव रविवार 20 सितंबर को धूमधाम से मनाया गया। शाम को माता के जयकारों के तुलसी भवन गूंजता रहा। जिसमें कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों सहित कोलकात्ता, चांडिल, धनबाद, हैदराबाद आदि शहरों से भी श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन श्री महासर माता परिवार जमशेदपुर (कोल्हान) द्वारा किया गया था। जिसमें शाम 4 बजे से महासर धाम के संजय गुरुजी के सानिध्य में विधिवत पूजा अर्चना शुभारंभ हुई। पांच जोड़े यजमान क्रमशः पुष्पा गाजानन्द भालोटिया, पलक-कुणाल भालांटिया, विशाखा-प्रिंस भालांटिया, नेहा-गितेश सिंघल, जयश्री-नंदलाल अग्रवाल ने संयुक्त रूप से पूजा करायी। कीर्तन उत्सव संध्या 6 बजे से शुभारंभ हुआ, जो रात 11.30 बजे तक चला। इस धार्मिक उत्सव में माता रानी की दिव्य ज्योत, भव्य दरबार, मनमोहक श्रृंगार, छप्पन भोग, महाप्रसाद, चुनरी उत्सव, पुष्प और इत्र की वर्षा आकर्षण का केंद्र बना रहा। उत्सव के समापन पर लगभग 650 से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
मईया मेरी महासर वालीः- आमंत्रित कलाकार अजमेर से जॉन अजमेरी, कानपुर से दीपांशी तिवारी, सहित स्थानीय कलाकार महावीर अग्रवाल ने माता के चरणों में भजनों की अमृत वर्षा कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों ने श्री गणेश वंदना गणपत बलकारी जी फतेह म्हारी आज करो… से भजनों का शुभारंभ किया। भजन गायकों ने थारे झांझ नगाड़ा बाजे रे…, किसने रचाई मेहंदी हाथ मे…, ल्याया थारी चुनड़ी करियो माँ स्वीकार…, इक बार माँ आ जावो…, सब झुमो नाचो माँ आने वाली है…, म्हारे सिर पर मईया जी रो हाथ…, हम मईया वाले है…, मईया मेरी महासर वाली…, मईया का परिवार है ये मईया…, महासर वाली मैया लगे है मुझको जान से प्यारी… आदि भजनो की प्रस्तुति से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।
इनका रहा योगदानः- आज के इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख रूप से दीपक भालोटिया, राजेश पसारी, प्रदीप मित्तल, गणेश भालोटिया, अनंत मोहनका, कृष्णा भालोटिया, गोविंद अग्रवाल, राजकुमार भालोटिया, दिलीप अग्रवाल पप्पू, संजय भालोटिया, अमित खेड़िया, टोनी भालोटिया, बलराम अग्रवाल, अजय भालोटिया, शिव कुमार सिंघानिया, राहुल भालोटिया, मंजू भालोटिया, संगीता मित्तल, राखी भालोटिया, सुनीता पसारी, संगीता आदि का योगदान रहा।
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एक हजार साल पुराना मंदिरः- मालूम हो कि महासर माता मंदिर जिला मुख्यालय महेंद्रगढ़ से लगभग 20 किलोमीटर दूर अटेली कनीना मार्ग पर अवस्थित महासर गांव में है, जो लगभग एक हजार साल पुराना हैं। वैष्णो देवी की तरह ही यहां भी माता पिडी रूप में प्रकट हुई थीं। मां दुर्गा का यह मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केन्द्र तो है ही, साथ ही महेन्द्रगढ़ जिले एवं उसके आसपास के लोग माता कीे कुल देवी के रूप में पूजा करते हैं। नवजात शिशुओं के प्रथम बार बाल यहीं उतारे जाते है वहीं नवविवाहित युगल यहां पहुंचकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह दुर्गा मां की सिद्ध एवं जागृत शक्तिपीठ है।

