जमशेदपुर।
भारतीय रेलवे में यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने और भ्रष्टाचार (Corruption) पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए रेलवे प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। पूर्व मध्य रेल (East Central Railway) की सतर्कता (विजिलेंस) टीम ने टिकट चेकिंग के नाम पर होने वाली अवैध वसूली के खिलाफ एक बड़ी और त्वरित कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को टीम ने गाड़ी संख्या 18183 टाटा-बक्सर एक्सप्रेस (Tata-Buxar Express) में औचक निरीक्षण कर एक भ्रष्ट टीटीई को रंगे हाथों पकड़ा है। इस सघन जांच अभियान से भ्रष्ट आचरण वाले रेलवे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
गुप्त सूचना पर टाटा-बक्सर एक्सप्रेस में सघन जांच
पूर्व मध्य रेलवे के हाजीपुर मुख्यालय को कुछ ट्रेनों में यात्रियों से अवैध वसूली किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी बीच सतर्कता विभाग को एक पुख्ता और गुप्त सूचना मिली कि टाटा-बक्सर एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा यात्रियों से अवैध तरीके से पैसों की उगाही की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए सतर्कता टीम ने बिना कोई समय गंवाए तुरंत एक विशेष दस्ता तैयार किया और बीच रास्ते में ही गाड़ी संख्या 18183 टाटा-बक्सर एक्सप्रेस में धावा बोल दिया। विजिलेंस टीम ने सादे लिबास में ट्रेन में प्रवेश किया और अपनी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी।
एसी कोच में चेकिंग और 4300 रुपये की अतिरिक्त नकदी बरामद
छापेमारी के दौरान सतर्कता टीम ने सीधे ट्रेन के वातानुकूलित (AC) कोच का रुख किया, जहां आसनसोल मंडल (Asansol Division) का एक टीटीई अपनी ड्यूटी पर तैनात था। टीम ने सबसे पहले टीटीई के पास मौजूद सरकारी धन (रेलवे राजस्व) और उसके द्वारा घोषित निजी धन (Private Cash) की गहन जांच की। रेलवे के कड़े नियमों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात किसी भी टीटीई को एक निश्चित सीमा तक ही निजी नकद रखने की अनुमति होती है और ड्यूटी शुरू करने से पहले उसे इसकी लिखित घोषणा करनी होती है। लेकिन जब विजिलेंस टीम ने इस टीटीई के पैसों का हिसाब-किताब मिलाया, तो उसके पास से घोषित निजी धन के अलावा 4,300 रुपये अधिक नकद बरामद हुए।
टीटीई के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू
पूछताछ के दौरान टीटीई इस अतिरिक्त 4,300 रुपये की नकदी का कोई भी संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज विजिलेंस टीम के सामने पेश नहीं कर सका। यह स्पष्ट हो गया कि यह बेहिसाब राशि यात्रियों से सीट उपलब्ध कराने या किसी अन्य अवैध एवज में वसूली गई थी। मामले की पुष्टि होते ही टीम ने तुरंत इस अवैध नकदी को जब्त कर लिया और नियमानुसार इसे रेलवे के खाते में जमा करवा दिया है। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए उक्त टीटीई के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू कर दी गई है।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की रेलवे की मुहिम
रेलवे प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहा है। रेलवे में कामकाज को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने और कर्मचारियों की जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही सतर्कता विभाग द्वारा निरंतर इस तरह की औचक छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे सघन अभियान जारी रहेंगे ताकि आम यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और शोषण-मुक्त सफर का अनुभव मिल सके।



