
जमशेदपुर:


बंगीय उत्सव समिति की वार्षिक सामान्य सभा एवं ‘बंग बंधु’ चर्चा सभा का आयोजन बिष्टुपुर स्थित मिलनी हॉल में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आगामी कार्यक्रमों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
सभा के पहले चरण की अध्यक्षता समिति की कार्यकारी अध्यक्षा अपर्णा गुहा ने की। संचालन का दायित्व महासचिव उत्तम गुहा ने निभाया। मंच पर प्रमुख रूप से कार्यकारी अध्यक्षा पूरबी घोष, राजु दत्ता, प्रकाश मुखर्जी, कोषाध्यक्ष अमित कुमार माइती, लेखा परीक्षक अमित बोस और उपाध्यक्ष सुभाष सिंह राय उपस्थित रहे।
कोषाध्यक्ष अमित कुमार माइती ने वर्ष 2025 में आयोजित बंगीय उत्सव की आय-व्यय का स्पष्ट ब्योरा प्रस्तुत किया, जिसे लेखा परीक्षक अमित बोस ने प्रमाणित किया। सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी “बंगीय उत्सव-2026” का आयोजन 10 एवं 11 जनवरी 2026 को जमशेदपुर के गोपाल मैदान (रिगल ग्राउंड), बिष्टुपुर में पुनः किया जाएगा। समिति ने बताया कि इस बार उत्सव को और अधिक भव्यता देने की तैयारी की जा रही है।
सभा के दूसरे चरण में ‘बंग बंधु’ सामाजिक गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें निर्णय लिया गया कि आगामी 21 सितंबर 2025, महालया के अवसर पर वृद्धाश्रम की माताओं के लिए नव वस्त्र, दैनिक उपयोग की सामग्री, खाद्य सामग्री एवं मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की जाएगी। यह विशेष पहल सबुज कल्याण संघ, टेल्को में आयोजित की जाएगी। समिति का मानना है कि सामाजिक दायित्व निभाते हुए बुजुर्गों के जीवन में खुशियां बांटना ही असली सेवा है।
इसके अलावा, समिति ने यह भी घोषणा की कि दीपावली से पूर्व शालबनी आश्रम के बच्चों एवं वरिष्ठ जनों को भी नए वस्त्र एवं आवश्यक सामग्रियाँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इन गतिविधियों से समाज में सहयोग और आपसी सौहार्द्र का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समिति के सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रमुख रूप से उपस्थित थे – अशोक दत्ता, प्रणव सरकार, उत्तान मुखर्जी, टुबलु राय चौधरी, देबजीत सरकार, प्रणव बड़ाट, रामकृष्ण, देबाशीष चक्रवर्ती, सौरभ, नवनीता पात्र, शिला बनिक, रूपा सरकार, ओम प्रकाश बनर्जी, रत्न पात्रा, अंजना दत्ता, सुदीप्ता बरुआ, सौरभ चटर्जी, शुभ्रता बरुआ, रंजना डे, जयति चटर्जी, सरबानी नंदी, कंकना सिंहराय, कोयल एवं अन्य सदस्यगण।
समिति की ओर से बताया गया कि बंगीय उत्सव न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक सेवा और एकजुटता का भी प्रतीक है। इसी सोच के साथ हर वर्ष उत्सव का आयोजन किया जाता है।



