जमशेदपुर: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचों का विकास आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिले के बहरागोड़ा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले जयपुरा क्षेत्र की मुख्य सड़क इसका जीता-जागता उदाहरण है। शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने का यह मार्ग इतना जर्जर और खतरनाक हो चुका है कि यह हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। इस बदहाल व्यवस्था के कारण स्थानीय लोगों और छात्रों के अभिभावकों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश पनप रहा है।
कीचड़ और जलभराव से जानलेवा हुआ सफर
जयपुरा क्षेत्र में स्थित प्लस 2 विद्यालय जयपुरा, मध्य विद्यालय जयपुरा और ज्ञानदीप इंग्लिश स्कूल को मुख्य धारा से जोड़ने वाली इस इकलौती सड़क की स्थिति अत्यंत ही दयनीय हो गई है। हल्की सी बारिश होते ही पूरी सड़क कीचड़, दलदल और जलभराव में तब्दील हो जाती है। सड़क के बीचों-बीच बड़े-बड़े और जानलेवा गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बरसात का गंदा पानी जमा हो जाता है। इस दलदली और जलमग्न रास्ते से गुजरना पैदल चलने वालों के लिए तो एक दुःस्वप्न है ही, साइकिल या अन्य दोपहिया वाहनों से आवागमन करना भी पूरी तरह से बाधित और जोखिम भरा हो जाता है।
हादसों का शिकार हो रहे नौनिहाल, अभिभावकों में डर
शिक्षा प्राप्त करने की चाह में हर दिन हजारों मासूम बच्चे इसी जर्जर मार्ग से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कीचड़ और फिसलन के कारण आए दिन कई छात्र-छात्राएं गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। कई बार बच्चों की स्कूल ड्रेस पूरी तरह खराब हो जाती है और उन्हें बीच रास्ते से ही घर लौटना पड़ता है। लगातार हो रही इन छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं ने अभिभावकों के मन में एक गहरा खौफ पैदा कर दिया है। बच्चों को स्कूल भेजते समय माता-पिता हर पल उनकी सुरक्षा को लेकर आशंकित रहते हैं। यह स्थिति न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है, बल्कि उनकी नियमित पढ़ाई में भी बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही है।
प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से कहना है कि जयपुरा मार्ग की इस दुर्दशा के बारे में संबंधित विभाग और जिला प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। पंचायत स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई गई है, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई भी ठोस या सकारात्मक पहल नहीं की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों की इस घोर उदासीनता और लापरवाही से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें किसी बड़ी अप्रिय घटना का इंतजार है।
जल्द पक्कीकरण नहीं हुआ तो होगा चरणबद्ध आंदोलन
सड़क की लगातार बिगड़ती स्थिति और प्रशासन के ढुलमुल रवैये को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर संजय पाल, पियूष प्रधान, लाल मोहन मुर्मू, समीर राणा, शंकर बेरा, हाड़ीराम साव, डाकू सेनापति, सुनील सिंह, विजय राणा, रघुनाथ मुर्मू और ततन पाल समेत कई अन्य प्रमुख ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से एक आपात बैठक की। इन सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में जिला प्रशासन से इस सड़क की अविलंब मरम्मत और स्थायी पक्कीकरण की जोरदार मांग की है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द से जल्द इस समस्या का कोई स्थायी और सुदृढ़ समाधान नहीं निकाला गया, तो पूरा क्षेत्रवासी एकजुट होकर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। छात्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक व्यापक और चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, और इस दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी विधि-व्यवस्था की समस्या की पूरी जिम्मेदारी केवल और केवल जिला प्रशासन की होगी।




