
जमशेदपुर। सेंट्रल सिख नौजवान सभा के प्रधान अमरीक सिंह ने सोशल मीडिया पर सिख गुरु साहिबान से जुड़े धार्मिक अवसरों के लिए गलत शब्दावली के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न संगठनों और आम लोगों से अपील की है कि सिख गुरुओं से संबंधित पोस्ट, विज्ञापन और संदेश तैयार करते समय सिख परंपरा और मर्यादा के अनुरूप शब्दों का इस्तेमाल किया जाए।
अमरीक सिंह ने कहा कि सिख धर्म में गुरु साहिबान के आगमन के अवसर को ‘प्रकाश पर्व’, ‘प्रकाश दिहाड़ा’ या ‘गुरपुरब’ के रूप में संबोधित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं के लिए ‘जन्मदिन’ या ‘जयंती’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
इसी तरह गुरु साहिबान के संसार से गमन के लिए ‘ज्योति-जोत दिवस’ या ‘ज्योति-जोत समाना’ शब्दों के प्रयोग की बात कही गई है। सभा के अनुसार, सिख परंपरा में इसे गुरु साहिब की ज्योति के परम ज्योति में विलीन होने के भाव से जोड़ा जाता है।
सोशल मीडिया पोस्ट में मर्यादित शब्दावली की अपील
अमरीक सिंह ने कहा कि कई बार राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता सही जानकारी के अभाव में सिख गुरुओं के लिए ‘जन्म दिवस’, ‘जयंती’ या ‘पुण्यतिथि’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर देते हैं। उनके अनुसार, इससे सिख संगत की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
उन्होंने सभी संबंधित लोगों से अपील की कि सिख गुरुओं के इतिहास और धार्मिक अवसरों से जुड़ी सामग्री तैयार करते समय सही शब्दावली का ध्यान रखा जाए।
सेंट्रल सिख नौजवान सभा के दिशा-निर्देश
सभा की ओर से धार्मिक अवसरों के लिए निम्न शब्दावली अपनाने की अपील की गई है—
- आगमन दिवस: ‘प्रकाश पर्व’, ‘प्रकाश दिहाड़ा’ या ‘गुरपुरब’ का प्रयोग किया जाए।
- गमन दिवस: ‘ज्योति-जोत दिवस’ या ‘ज्योति-जोत समाना’ शब्दों का इस्तेमाल किया जाए।
- शहीदी दिवस: गुरु साहिबान के बलिदान दिवस के लिए ‘शहीदी पर्व’ या ‘शहीदी दिहाड़ा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाए।
IT सेल और डिजिटल डिजाइनरों से भी अपील
सेंट्रल सिख नौजवान सभा ने राजनीतिक दलों के आईटी सेल, पीआर एजेंसियों और डिजिटल डिजाइनरों से भी आग्रह किया है कि सिख गुरुओं से जुड़े बधाई, श्रद्धांजलि या अन्य संदेश तैयार करने से पहले सिख मर्यादा और गुरबाणी की शब्दावली की जानकारी जरूर लें।
अमरीक सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को शब्दों के चयन को लेकर असमंजस हो तो वह सेंट्रल सिख नौजवान सभा के पदाधिकारियों या स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से मार्गदर्शन ले सकता है। उनका कहना है कि धार्मिक अवसरों से संबंधित संदेशों में सही शब्दावली का इस्तेमाल सिख परंपरा और धार्मिक भावनाओं के सम्मान के लिए महत्वपूर्ण है।

