
जमशेदपुर।
क्षेत्रीय रेलवे प्रशिक्षण संस्थान (ZRTI) सिनी में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के तत्वावधान में भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना के तहत सर्पदंश निवारण, नियंत्रण और संरक्षण पर एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से रेलकर्मियों को जहरीले और विषहीन सांपों की पहचान करने, काटने के बाद बरती जाने वाली सावधानियों और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा विधियों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया गया।
7 रेल डिवीजनों के स्टेशन और ट्रेन मैनेजर हुए शामिल
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय रेलवे के 7 प्रमुख डिवीजनों—बिलासपुर, खुर्दा, विशाखापट्टनम, चक्रधरपुर, रांची, आद्रा और खड़कपुर से कुल 190 रेलकर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण पाने वालों में मुख्य रूप से स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), टावर वैन चालक और सहायक लोको पायलट शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर और राष्ट्रपति पदक सम्मानित संतोष कुमार ने बताया कि रेलकर्मियों को अक्सर ऐसे दूर-दराज और जंगली क्षेत्रों में ड्यूटी करनी पड़ती है, जहां सर्पदंश (सांप काटने) का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसी कठिन परिस्थितियों में सही प्रशिक्षण ही सुरक्षा और बचाव का सबसे बड़ा माध्यम साबित होता है।
डम्मी सांप और पावर पॉइंट से सीखी जहरीले सांपों की पहचान
प्रशिक्षण के दौरान पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन और डम्मी सांपों का उपयोग कर रेलकर्मियों को जहरीले और बिना जहर वाले सांपों की शारीरिक संरचना व बनावट का अंतर समझाया गया। इसके साथ ही यह भी सिखाया गया कि यदि सांप काटकर भाग जाए, तो शरीर पर बने दांतों के निशान और लक्षणों को देखकर कैसे पहचानें कि सांप जहरीला था या नहीं।
कार्यशाला में सांप के जहर के विभिन्न प्रकारों जैसे न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सीक और मायोटॉक्सीक का मानव शरीर पर होने वाले प्रभावों की तकनीकी जानकारी दी गई।
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भारत में केवल 15% सांप ही विषैले, अंधविश्वास से बचने की सलाह
संतोष कुमार ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि भारत में सांपों की लगभग 275 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 15 प्रतिशत सांप ही जहरीले होते हैं। इसके अलावा, जहरीले सांपों द्वारा काटे जाने के मामलों में भी 20 प्रतिशत ‘ड्राई बाइट’ (बिना जहर छोड़े काटना) होते हैं। इसलिए सांप के काटने पर घबराने के बजाय मनोबल मजबूत रखना चाहिए और ओझा-गुनी जैसे अंधविश्वास के चक्कर में न पड़कर सीधे अस्पताल जाना चाहिए।
इस दौरान डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने चोट लगने की स्थिति में विभिन्न प्रकार की बैंडेज बांधने की विधि का मॉक ड्रिल के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम की सराहना करते हुए स्टेशन अधीक्षक विजय कुमार प्रसाद, वीरेंद्र कुमार और एस के बिस्वास ने इसे बेहद उपयोगी बताया। कार्यशाला के समापन पर जेडआरटीआई (ZRTI) के मुख्य अनुदेशक संतोष कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



