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Home » उत्तानपाद प्रसंग मे रूप व गुण पर चर्चा भागवत अहंकार को खत्म करने का उचित दर्शन
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उत्तानपाद प्रसंग मे रूप व गुण पर चर्चा भागवत अहंकार को खत्म करने का उचित दर्शन

BJNN DeskBy BJNN DeskJune 2, 2014No Comments3 Mins Read
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संवाददाता, जादूगोड़ा ,2 जुन

जादूगोड़ा यूसिल कालोनी शिव मंदिर प्रांगण मे चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन काशी से आए हुए प्रख्यात भागवत कथा वाचक डॉ पुंडरिक शास्त्री जी ने रविवार को रूप व गुण मे अंतर को स्पस्ट करते हुए उतानपाद प्रसंग की चर्चा की कहा की उतानपाद की दो रानियो मे रूप[ व गुण का अनोखा मिश्रण था पहली रानी जहाँ रूपवती थी व राजा का विशेष आश्रय प्राप्त था वहीं उनकी दूसरी रानी रूपवान नहीं थी लेकिन सासन मे वह राजा को हमेशा सहयोग करती थी ।

राजा उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो भार्याएं थीं । राजा उत्तानपाद के सुनीतिसे ध्रुव तथा सुरुचिसे उत्तम नामक पुत्र हुए । यद्यपि सुनीति बडी रानी थी किंतु राजा उत्तानपादका प्रेम सुरुचिके प्रति अधिक था । एक बार राजा उत्तानपाद ध्रुवको गोद में लिए बैठे थे कि तभी छोटी रानी सुरुचि वहां आई । अपने सौतके पुत्र ध्रुवको राजाकी गोदमें बैठे देख कर वह ईष्र्या से जल उठी । झपटकर उसने ध्रुवको राजाकी गोदसे खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उनकी गोदमें बिठाते हुए कहा, ‘रे मूर्ख! राजाकी गोदमें वही बालक बैठ सकता है जो मेरी कोखसे उत्पन्न हुआ है । तू मेरी कोखसे उत्पन्न नहीं हुआ है इस कारणसे तुझे इनकी गोदमें तथा राजसिंहासनपर बैठनेका अधिकार नहीं है । यदि तेरी इच्छा राज सिंहासन प्राप्त करनेकी है तो भगवान नारायणका भजन कर । उनकी कृपासे जब तू मेरे गर्भसे उत्पन्न होगा तभी राजपद को प्राप्त कर सकेगा ।

पांच वर्षके बालक ध्रुवको अपनी सौतेली माताके इस व्यवहारपर बहुत क्रोध आया पर वह कर ही क्या सकता था? इसलिए वह अपनी मां सुनीतिके पास जाकर रोने लगा । सारी बातें जाननेके पश्चात् सुनीति ने कहा, ‘संपूर्ण लौकिक तथा अलौकिक सुखोंको देनेवाले भगवान नारायणके अतिरिक्त तुम्हारे दुःख को दूर करनेवाला और कोई नहीं है । तू केवल उनकी भक्ति कर ।’

माताके इन वचनोंको सुनकर वह भगवानकी भक्ति करनेके लिए निकल पडा । मार्गमें उसकी भेंट देवर्षि नारदसे हुई । नारद मुनिने उसे वापस जानेके लिए समझाया किंतु वह नहीं माना । तब उसके दृढ संकल्प को देख कर नारद मुनि ने उसे ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्रकी दीक्षा देकर उसे सिद्ध करने की विधि समझा दी । बालक ध्रुवने यमुनाजी के तटपर मधुवनमें जाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्रके जाप के साथ भगवान नारायण की कठोर तपस्या की । अल्पकालमें ही उसकी तपस्यासे भगवान नारायण उनसे प्रसन्न होकर उसे दर्शन देकर कहा, ‘हे राजकुमार! मैं तेरे अन्तःकरण की बात को जानता हूं । तेरी सभी इच्छाएं पूर्ण होंगी । समस्त प्रकार के सर्वोत्तम ऐश्वर्य भोग कर अंत समयमें तू मेरे लोक को प्राप्त करेगा ।

कथा के उपरांत आरती पूजा कर उपस्थित हजारो श्र्धालुओ के बीच प्रसाद का वितरण किया गाय ।

सोमवार के कार्यक्रम प्रात 6 बजे से यज्ञारम्भ , सप्तसती पाठ , प्राण प्रतिस्ठा , बेदिक पूजन , हवन , आरती , प्रसाद , श्रीमद भागवत कथा सांय 6 बजे से ।

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BJNN Desk
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आनंद किशोर बिहार झारखंड न्यूज़ नेटवर्क में कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे सामाजिक मुद्दों, जनहित और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि रखते हैं। आनंद का उद्देश्य कमजोर और जरूरतमंद लोगों की आवाज को सही मंच तक पहुंचाना है। वे निष्पक्ष, सरल और प्रभावशाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं।

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