
जमशेदपुर। नए कृषि कानून के खलाफ आंदोलन कर रहे नेताओं एवं खालसा एड सोसायटी तथा पंजाबी गायक को एनआईए द्वारा सम्मन किए जाने का सतनाम सिंह गंभीर ने विरोध किया है। इसे उन्होंने लोकतंत्र की हत्या का प्रयास बताया है।

ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्वी भारत राज्य कमेटी के प्रभारी सतनाम सिंह गंभीर ने कहा कि केंद्र सरकार किसान आंदोलन से घबराई हुई है। इसका विस्तार पूरे देश के स्तर पर फैल रहा है। किसान एवं उनके समर्थक सामाजिक संगठन गोलबंद हो रहे हैं।यही कारण है कि प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री को अब एनआईए जैसी एजेंसी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।राजनीतिक आकाओं के चक्कर में देश में सीबीआई की दुर्दशा हो चुकी है और एनआईए का भी यही हाल केंद्र सरकार करना शायद चाहती है।
किसान नेताओं एवं खालसा एड संस्था तथा पंजाबी गायक को एनआईए द्वारा सम्मान किया जाना यही दर्शाता है कि वह सरकार के इशारे पर काम कर रही है। देश में किसानों का नेतृत्व कर रहे पंजाब के किसान नेताओं को मानसिक शारीरिक रूप से तोड़ना चाहती है। यदि प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सच में राष्ट्रभक्त हैं और विदेशों से आने वाले पैसे के दुरुपयोग को रोकना चाहते हैं तो हर उस सामाजिक धार्मिक राजनीतिक संगठन की जांच का आदेश एनआईए को दें।सारी सच्चाई सामने आ जाएगी कि विदेशों से प्राप्त पैसों का दुरुपयोग देश में कौन सी संस्था कर रही है।खालसा एड नेपाल हो या भारत हो या म्यांमार हो या दुनिया का हर कोना। जहां प्राकृतिक आपदा आई है वहां दवाइयां पहुंचाते हुए भोजन की सामग्री मुहैया करते हुए खालसा एड दिख रहा है।
एनआईए एवं केंद्र सरकार इतिहास पढ़ कर समझ लें कि दमन से सिख डरते नहीं है बल्कि उनके हौसले और बुलंद होते हैं। सतनाम सिंह गंभीर ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह लोकतांत्रिक जो प्रक्रिया भारत में चल रही है संविधान ने जो आंदोलन की इजाजत दी है उसका सम्मान करें। बेवजह आंदोलन को तोड़ने की जरूरत ना करें

