सरकारी गोरखधंधे का शिकार है सबर के बच्चे

रवि झा,जमशेदपुर.3 अप्रेल

सरकार के द्वारा विलुप्त होती जनजाति के लिए कई कार्य किए जा रहे है लेकिन वे कार्य सरकारी अधिकारीयो के उदासीनता के कारण सरकार की कई योजनाएँ धरातल पर उतर नही पाती हैं।इसी तरह का वाक्या जमशेदपुर से करीब 25 किलोमीटर दुर स्थित जादुगोङा से सटे पोटका प्रखण्ड के भाटिन पंचायत से खङिया कोचा गाँव में देखने को मिला ।जहाँ सबर जनजाति के लोग रहते है और उस गांव में सरकार के द्वारा सबर जनजाति के बच्चों को पढाने के लिए स्कुल भी खोला गया ,स्कुल तो सरकार के द्वारा इस लिए खोला गया कि इनके बच्चो को शिक्षीत किया जा सके।लेकिन स्कुल में बच्चो का आना इन दिनो से बंद है कारण स्कुल मे मिड डे मिल के तहत मिलनेवाले भोजन बच्चो नही मिल पाना.स्कुल में बच्चो को पढा रही एक शिक्षीका से मिड नही मिलने का कारण पुछा गया तो शिक्षीका अनिता मुर्मू ने बताया कि पैसा नही मिल पाने के कारण दस दिनो में मिड मिल बन्द है और इस कारण बच्चे भी कम आ रहे हैँ।अनिता ने बताया कि इस स्कुल में बच्चे 36 है जिसमें आघे से अधिक सबर जनजाति के है ,और कुछ आदिवासी बच्चे हैं।शिक्षीका ने बताया कि इस संबध में बताया कि इसकी जानकारी ऊपर के अधिकारी को जानकारी भी दे दी गई है लेकिन अभी तक उसका कोई जबाब नही आया है।शिक्षीका ने कहा कि इस स्कुल मे मात्र वे ही एक पारा टीचर है और चार माह से वेतन भी नही मिला है
एक तरफ सरकार के द्वारा लुप्त हो रहे सबर जनजाति को बचाने के लिए कई योजना चलाने का दावा किया जा रहा है दुसरी तरफ इस जाति के बच्चे भोजन के अभाव में स्कुल नहीजा पा रहे। खङिया कोचा गाँव का यह स्कुल सरकारी तत्र के दावे को झुठला रहा है।

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