

संजय कुमार सुमन


मधेपुरा।
भी दिखाई पड़ेगा। भारत मे यह ग्रहण पूरी तरह से दृश्यमान होगा।शुक्रवार आज की रात को चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत मे इसका सूतक रात 1.24 बजे से शुरू होगा। रात 10.22 बजे से ग्रहण का स्पर्श होगा। रात 12.24 बजे ग्रहण का मध्य होगा और ग्रहण का मोक्ष रात 2.26 बजे होगा। ग्रहण के सूतक के पूर्व से ही सभी मंदिरो के पट बंद हो जाएंगे। ग्रहण के दौरान भोजन करना वर्जित है, परंतु बुजुर्ग व बीमार व्यक्ति भोजन कर सकते है। ग्रहण के दौरान जप हवन व कीर्तन-भजन करना श्रेयस्कर होगा। यह ग्रहण यूरोप, एशिया, आस्ट्रेलिया, दक्षिणी अमेरिका सहित पूर्व अफ्रीका मे
खगोलीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी अपनी धूरी पर भ्रमण करते हुए चंद्रमा व सूर्य के बीच आ जाती है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा का पूरा या आधा भाग ढ़क जाता है। इसी को चंद्र ग्रहण कहते हैं। भारतीय राजधानी नई दिल्ली के रेखांश-अक्षांश अनुसार भाद्रपद, पूर्णिमा, शनिवार दिनांक 17.09.16 को मीन राशि और पूर्वाभद्रपद नक्षत्र में चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण की उपच्छाया से पहला स्पर्श शुक्रवार दिनांक 16.09.16 को रात्री 10 बजकर 27 मिनट और 22 सेकंड पर होगा। चंद्रग्रहण का परमग्रास शनिवार दिनांक 17.09.16 रात 12 बजकर 25 मिनट व 48 सेकंड पर होगा। चंद्रग्रहण का उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श रात 02 बजकर 24 मिनट व 15 सेकंड पर होगा। इसकी अवधि 03 घण्टे 56 मिनट 52 सैकण्ड रहेगी। इस ग्रहण की उपच्छाया आंखों से नहीं दिखाई देगी। अत: भारत में चंद्रग्रहण की छाया व
सनातन धर्म में चंद्रग्रहण को अशुभ माना जाता है। सनातन धर्म की मान्यतानुसार चंद्र ग्रहण के समय खान-पान वर्जित माना जाता है। मत्स्य पुराण, भविष्य पुराण व नारद पुराण में चंद्रग्रहण के समय वर्जित बातों का उल्लेख है। मत्स्य पुराण के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र सिद्धि व आराधना का विशिष्ट स्थान है। मान्यतानुसार गर्भवती महिला को ग्रहण के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस काल में राहु व केतु का दुष्प्रभाव बढ्ने से गर्भ में पल रहे बच्चें को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं व गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
मान्यतानुसार इस काल में तेल लगाना, खानपान, बालों में कंघी, ब्रश आदि कार्य वर्जित हैं।
क्या होगा इसका असर
ऐसा माना जाता है कि चंद्रग्रहण कुंवारों के लिए अशुभ माना जाता है क्योंकि चंद्रमा का संबंध शीतलता व सुंदरता से होता है ग्रहण काल में चंद्रमा उग्र हो जाता है जिसका बुरा असर कुवांरे लड़के-लड़कियों पर पड़ता है अत: श्रापित होने पर जो भी कुंवारा लड़का या लड़की उसे देखता है तो उसकी शादी या तो रूक जाती है या बहुत मुश्किलों से तय होती है।
चंद्र ग्रहण केवल पूर्णमासी पर ही लगता है और सूर्य ग्रहण अमावस पर ही दिखेगा। पौराणिक काल से राहू और केतु को समुद्र मंथन से जोड़ा गया है और ज्योतिष इन्हें छाया ग्रह मानता है। भूकंप आने व प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी भी ऐसी खगोलीय घटनाओं से की जाती है। ज्योतिष शास्त्र न केवल हजारों सालों से यह बताता आया है कि ग्रहण कब लगेंगे बल्कि यह भी बताता है कि धरती तथा धरती वासियों एवं अन्य ग्रहों पर भी ऐसी खगोलीय घटना का क्या प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषशास्त्र के दार्शनिक खंड के अनुसार खगोलीय ग्रहण के दौरान समस्त जीवों पर इसका शुभाशुभ प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष व धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में दान-पुण्य व मंत्र जाप का विशिष्ट महत्व बताया गया

