नई दिल्ली/कैसाब्लांका: भारतीय नौसेना का प्रतिष्ठित नौकायन प्रशिक्षण पोत ‘आईएनएस सुदर्शिनी’ 15 अप्रैल 2026 को मोरक्को के प्रमुख और ऐतिहासिक बंदरगाह कैसाब्लांका पहुंच गया है। पोत की यह अहम यात्रा भारतीय नौसेना के महासागरीय मिशन ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) के तहत संचालित की जा रही है। कैसाब्लांका के इस प्रतिष्ठित बंदरगाह पर आईएनएस सुदर्शिनी का शानदार आगमन भारत की बहुआयामी ‘महासागर’ (MAHASAGAR) परिकल्पना के पूरी तरह से अनुरूप है। इस परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना, आपसी जुड़ाव बढ़ाना और पूरे क्षेत्र में शांति एवं विकास को बढ़ावा देना है। यह महत्वपूर्ण दौरा भारत और मोरक्को के बीच लगातार प्रगाढ़ होते द्विपक्षीय संबंधों और नौसैनिक सहयोग की मजबूती का एक बहुत बड़ा प्रतीक है।
मोरक्को के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ हुई शिष्टाचार भेंट
कैसाब्लांका बंदरगाह पर सफलतापूर्वक डॉक करने के बाद, आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय मुलाकात की। उन्होंने मोरक्को नौसेना के ‘सेंट्रल मैरीटाइम सेक्टर’ के कमांडर कमोडोर हसन अकुली और ‘रॉयल नेवल स्कूल’ के निदेशक कमोडोर उमर नासरी से शिष्टाचार भेंट की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच भविष्य में समुद्री सहयोग बढ़ाने, संयुक्त रणनीतियों पर काम करने और उन्नत प्रशिक्षण के आदान-प्रदान की अपार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। यह संवाद दोनों देशों के बीच सामरिक समझ को और अधिक गहरा करेगा।
तीन दिवसीय दौरे में होंगे कई अहम और बहुआयामी कार्यक्रम
आईएनएस सुदर्शिनी की इस तीन दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। पोत का चालक दल रॉयल मोरक्कन नौसेना के अधिकारियों और कर्मियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करेगा। इस दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर मोरक्को के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की मेजबानी की जाएगी। इसके अलावा, दोनों देशों के नौसैनिक पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। इन बहुआयामी पहलों का मुख्य उद्देश्य नौसैनिक सहयोग, कूटनीतिक संबंधों और आपसी सद्भावना को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। यह यात्रा न केवल चालक दल और युवा प्रशिक्षुओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान कर रही है, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री भागीदारी, वैश्विक पहुंच और महासागरीय नौवहन में भारतीय नौसेना की अद्भुत दक्षता को भी पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रही है।
लगातार मजबूत हो रहे हैं भारत और मोरक्को के रक्षा संबंध
भारत और मोरक्को के बीच नौसैनिक संबंध पिछले कुछ समय में काफी मजबूत हुए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले मात्र एक वर्ष के भीतर भारतीय नौसेना के चार प्रमुख युद्धपोत—आईएनएस तबर, आईएनएस तरकश, आईएनएस सुमेधा और आईएनएस तुशील—कैसाब्लांका का सफल दौरा कर चुके हैं। इन लगातार हो रहे दौरों से दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास और परस्पर संचालन क्षमता (Interoperability) में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय सैन्य आवाजाही भी तेज हुई है। ज्ञात हो कि नवंबर 2025 में रॉयल मोरक्कन नेवी के इंस्पेक्टर रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने भी भारत की दक्षिणी नौसेना कमान का अहम दौरा किया था, जिसने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा था।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का वैश्विक संदेश दे रही भारतीय नौसेना
आईएनएस सुदर्शिनी अपनी इस गौरवशाली यात्रा को ऐतिहासिक समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारों के माध्यम से सफलतापूर्वक जारी रखे हुए है। यह मिशन सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह भारत के प्राचीन दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) की भावना को भी वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रहा है। यह शानदार अभियान वैश्विक समुद्री सहयोग, शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।







