
बैठक में झारखंड राज्य के मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी, जिला उपायुक्त अरवा राजकमल, उप विकास आयुक्त संदीप बख्शी एवं अपर उप समाहर्ता जावेद अंसारी सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी रहे उपस्थित


मेरा मानना है कि मनरेगा कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों को गरीबी मुक्त करने का एक बेहतर विकल्प है, बशर्ते ग्रामीण क्षेत्र के लोग जागृत हो और हमारी समस्त टीम कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तत्पर होंः सिद्धार्थ त्रिपाठी, राज्य मनरेगा आयुक्त, झारखंड,
संतोष वर्मा
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में आज झारखंड राज्य के मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी, जिला उपायुक्त अरवा राजकमल, उप विकास आयुक्त संदीप बक्शी, अपर उप समाहर्ता जावेद अंसारी, जिला भू अर्जन पदाधिकारी -सह- डीआरडीए निदेशक एजाज अनवर सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी के उपस्थिति में मनरेगा योजना के तहत जिले में एक बड़े बदलाव के उद्देश्य की पूर्ति हेतु बैठक आयोजित कर बृहत रूप से विचार विमर्श किया गया है।
इस संबंध में बैठक के उपरांत जानकारी देते हुए मनरेगा आयुक्त के द्वारा कहा गया कि आज की बैठक कोई समीक्षा बैठक नहीं है। सरकार के द्वारा मनरेगा के तहत प्रारंभ किए गए नवाचार के परिणामों से रूबरू होने के उद्देश्य से आज जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत केंदू पंचायत का भ्रमण किया गया, तदुपरांत समाहरणालय स्थित सभागार में उपर्युक्त पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर जिले में एक बड़े परिवर्तन के उद्देश्य की पूर्ति हेतु विस्तृत रूप से चर्चा किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रायः देखने को मिलता है कि पूर्व से संचालित व्यवस्था में कुछ प्रतिशत परिवर्तन ही सभी जगह देखने को मिलता है, लेकिन क्या हम इस योजना के तहत अमूलचूल परिवर्तन कर पाए हैं, अपने जिले में हमारी क्या जरूरतें हैं तथा क्या हम इन चीजों की पूर्ति आम जनों के लिए कर पा रहे हैं से संबंधित सभी बिंदुओं पर प्रखंड वार आज के बैठक में चर्चा किया गया है। उन्होंने कहा कि हम पुनः जिले का भ्रमण करेंगे और हमारा प्रयास भी है तथा विश्वास भी है कि इस बैठक के उपरांत हमारी पूरी टीम एक नए तरीके से काम करेगी और आगामी आने वाले दो-तीन सप्ताह में मनरेगा सहित ग्रामीण विकास विभाग के सभी कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
मनरेगा आयुक्त के द्वारा जानकारी देते हुए कहा गया कि गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य की पूर्ति हेतु संचालित मनरेगा योजना देश सहित पूरे राज्य का बहुत बड़ा कार्यक्रम है जिसे अधिकांशतः व्यक्ति सिर्फ एक रोजगार का साधन मात्र समझते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा यह मानना है कि मनरेगा कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों को गरीबी मुक्त करने का एक बेहतर विकल्प है जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजना का संचालन, सरकारी एवं निजी जमीनों पर वृक्षारोपण का कार्यक्रम यथा फलदार वृक्ष, बांस प्रजाति का पौधारोपण, चेक डैम का निर्माण, सड़क/पीसीसी पथ का निर्माण, फेवर ब्लॉक का निर्माण, चबूतरे का निर्माण, आंगनवाड़ी केंद्र का निर्माण, पंचायत भवन का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उपर्युक्त सभी आधारभूत संरचना का निर्माण जोकि 7-8 विभाग मिलकर भी नहीं कर पाएंगे उतने सभी निर्माण कार्य मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा सकता है बशर्ते ग्रामीण क्षेत्र के लोग जागृत हो और हमारी समस्त टीम कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तत्पर हों।

