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जमशेदपुर। 10 जूलाई(हि.स.) सोमवार  को  टाटानगर आनेवाली  छपरा –कटिहार- टाटा लिंक एक्सप्रेस .  अहमदाबाद- हावड़ा एक्सप्रेस, एलेप्पी-टाटा एक्सप्रेस और…

जमशेदपुर।09जुलाई(हि.स.) मुख्तार सिंह एवं अमरजीत सिंह राजा चेयरमैन बने सुरजीत सिंह को मुख्य सलाहकार बनाया गया बड़ी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी…

जमशेदपुर।09जुलाई सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल धालभूम के एसडीओ श्री प्रभात कुमार से उनके आवासीय कार्यालय में मिला…

जमशेदपुर। 09जुलाई श्री साईनाथ देवस्थानम , घोड़ाबांधा में “श्री गुरुपूर्णिमा महोत्सव” का आयोजन किया गया Iस पावन अवसर पर…

जमशेदपुर। सत्यानन्द योग केंद्र , जमशेदपुर के तत्वाधान में साक्ची स्थित बुद्ध मंदिर के प्रांगन में आयोजित श्री गुरुपूर्णिमा उत्सव…

जमशेदपुर।09 जुलाई कश्मीर के बारामुला में पाकिस्तान के विरुद्ध मोर्चा संभालते बलिदान हुए अमर शहीद किशन दुबे की…

जमशेदपुर। आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम की ओर से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पार्वती घाट स्थित अंत्योदय आश्रम में रोगियों के बीच फल वितरण किया गया एवम गदरा में लगभग 300नारायणो के बीच भोजन करवाया गया इस कार्यक्रम में आनंद मार्ग के आचार्य स्वरूपानंद अवधूत विजय जी भुक्ति प्रधान योगेश जी विनय देव सुनील आनंद तथा अन्य लोगों ने भीभाग लिय गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आनंद मार्ग के आचार्य स्वरूपानंद अवधूत ने कहा कि गुरु के विषय में प्रचलित परिभाषा है कि गुरु अंधकार को दूर करते हैं। गुरु इस जगत के मनुष्य के जीवन में पूर्णिमा का प्रकाश लेकर आते हैं। गुरु इस भवसागर से पार लगाने वाले सत्ताहै। गुरु के विषय में कहा गया है— गुरु स्वयं  तारकब्रह्म है जो मानवता के कल्याण के लिए मुक्ति की आकांक्षा लेकर जीने वाले मनुष्य के जीवन में प्रकाश लेकर आते है। गुरु का देहसंकल्प देह होता है ।गुरु के कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं होते हैं। मनुष्य के सर्वांगीण विकास जैसे शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक ,समाजिक ,आर्थिक, राजनीतिक ,सांस्कृतिक,भौगोलिक, साहित्यिक,वैज्ञानिक एवं अन्य सभी क्षेत्रों के विकास के लिए स्पष्ट दर्शन और निर्देश देते हैंतंत्र में गुरु के लक्षणों की चर्चा करते हुए कहा  गया है कि वे शांत, दांत, कुलीन, विनीत, शुद्धाचारी,सुप्रतिष्ठित, शुचिरद्क्ष ,  सुबुद्धिमान,आश्रमी, ध्याननिष्ठ, तंत्रमंत्र विशारद होते हैं औरनिग्रह- अनुग्रह के द्वारा साधक का कल्याण करते हैं ।गुरु गर्व  से परे सर्वशक्तिमान ,सर्वज्ञ और सर्वत्र सत्ता होते हैं । गुरु तीन प्रकार के होते है ।अधम ,मध्यम और उत्तम। अधम गुरु वे है जो उपदेशात्मक बातें अपने भौतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए करते हैं स्वयं दिए गए उपदेशों का पालन नहीं करते है।