
गम्हरिया


झारखंड के राजकीय पोलिटेक्निक संस्थानों में संविदा के आधार पर की जा रही व्याख्याताओं की बहाली प्रक्रिया में वर्षों से अंशकालीन व्याख्याता के रुप में सेवा दे रहे लोगों को दरकिनार किए जाने से उनमें रोष व्याप्त है। इससे आक्रोशित व्याख्याताओं ने आंदोलन का बिगुल फूंकते हुए सरकार से नई बहाली प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग किया है। विदित है कि वर्षों से अपनी सेवा दे रहे अंशकालीन व्याख्याताओं की सेवा आगामी अक्टूबर माह में समाप्त हो रही है। इनकी जगह पर सरकार की ओर से संविदा पर दूसरे व्याख्याताओं की बहाली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। सरकार के इस निर्णय से आक्राशित गम्हरिया स्थित राजकीय महिला पोलिटेक्निक के व्याख्याताओं ने आंदोलन तेज करते हुए सरकार की इस नीति के खिलाफ आन्दोलन का निर्णय लिया है। व्याख्याताओं ने बताया कि राज्य में कुल 13 महिला एवं पुरुष राजकीय पोलिटेिक्नक काॅलेजों में वर्षों से कुल 265 अंशकालिन प्राध्यापक कार्यरत है। इनमें कई ऐसे प्राध्यापक हैं, जो तीन से लेकर 22 साल तक कार्य करते हुए स्थायीकरण की उम्मीद पर अपनी जिंदगी बिता दिया है। वर्तमान में उच्च तकनीकि शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की ओर से सभी प्रभारी प्राचार्यों को जारी आदेश में सेवा समाप्ति की जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि नई बहाली प्रक्रिया भी संविदा पर की जा रही है, जबकि वर्तमान में संविदा पर कार्यरत व्याख्याताओं के समक्ष बेरोजगारी के बाद रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। गम्हरिया के राजकीय महिला पोलिटेक्नीक में कुल 32 व्याख्याता कार्यरत हैं। इस उम्र में अब वे कहां जाकर काम करेंगे। व्याख्याताओं ने सरकार से इस नीति को वापस लेने एवं वर्तमान में कार्यरत सभी व्याख्याताओं को स्थायी करने की मांग किया है। उन्होंने बताया कि अगर इस मामले में अविलंब कार्रवाई नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

