

जमशेदपुर ।
शहर के बारीडीह कालूबागान इलाके में स्थित सूफी संत हजरत मिस्कीन शाह की मजार में हर दिन हाथों में पासपोर्ट की फोटोकॉपी लेकर लोग आते है और मजार मे उस कॉपी को बांध कर चले जाते है। बस उन्हे अपनी मन्नत मांगने के बाद बाबा के दरबार पर सात सप्ताह मे कम से कम एक दिन आकर मजार पर आना पड़ता। उसके बाद आपकी ईच्छा पुर्ति होनी तय है। यहां पर सबसे ज्यादा भीड़ गुरुवार और शुक्रवार को होता है।
यहां आने वाले लोगो की माने तो पासपोर्ट बाबा की मजार पर आने के बाद कई लोगों को विदेश में नौकरी मिली है। यहां आने वालों में सबसे ज्यादा तादाद उन लोगों की है जो नौकरी करने के लिए खाड़ी देशों या यूरोप जाना चाहते हैं।
पासपोर्ट बाबा का नाम क्यो पड़ा
सूफी संत हजरत मिस्कीन शाह की मजार को लोग पासपोर्ट बाबा के नाम से जानते है। पासपोर्ट बाबा के नाम से यह इसलिए प्रसिद्द हुआ कि क्योकि यहां पर सबसे अधिक लोग विदेश जाने के लिए बाबा के दरबार मे मन्नते मांगते है। विदेश जाने केलिए पासपोर्ट की अवश्यता पड़ती है। इसलिए पासपोर्ट के फोटोकॉपी अधिक लटके है। इसकारण लोग इस जगह को पासपोर्ट वाले बाबा के नाम से जानने लगे।
मजार के देख रेख करते है पीर मोहम्मद बाबा
70 वर्षीय पीर मोहम्मद 1964 से अकेले ही मजार के देखभाल करते आ रहे है। पीर मोहम्मद का कहना है कि यहां लोग अपनी तकलीफ लेकर आते है और एक खत बाबा का नाम लिख कर अपनी बातों को लिखते है और पेड़ पर लगा कर चले जाते है मन्नत पूरी हो जाने पर वे बाबा का आर्शीवाद लेते है और खुशी से जो उनसे बन पड़ता है वह दान देकर चले जाते है। उनका कहना है कि विदेश में नौकरी पाने वालों के अलावा मजार पर छात्र-छात्राएं या उनके अभिभावक भी परीक्षा के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी पेड़ पर टांगने आते हैं जिससे रिजल्ट अच्छा आए। लोग नौकरी के लिए विदेशी कंपनियों में भेजे गए आवेदनों की प्रति भी पेड़ पर लटकाते हैं। उनका दावा है कि अब तक सैकड़ों युवक इसी तरीके से विदेशों में अच्छी नौकरियां पा चुके हैं। उन्होने कहा कि यह दरगाह सुबह 6 बजे से रात 8.30 तक खुला रहता हैं। यहां पर साल मे दो बार उर्स मनाया जाता है ।इस दौरान इस दरगाह मे काफी भीड लगी रहती है।
1940 मे हुई समाधि की स्थापना
बारीडीह स्थित हजरत मिस्कीन शाह बाबा का सालाना उर्स , मुबारक, मजार में उनकी समाधि की स्थापना 1940 मे हुई है । कहा जाता है कि बाबा पहले यही रहा करते थ। इसलिए शरीर त्याग करने के बाद उनकी समाधि .यही पर बना दी गई। दूर दूर से लोग अपनी समस्याओ व दूख दर्द को लेकर बाबा के दरबार आने लगे ।
एक लाख से ज्यादा खत बाबा के नाम
अब तक बाबा के नाम एक लाख से भी ज्यादा खत आ चुके है।। जमशेदपुर के रहने वाली अप्रिता चद्वा ने अपने पति की नौकरी और घर के ठीक ढंग से देखने के लिए बाबा को खत लिखा है।वही कदमा की रहने वाली नेहा अर्सद नेट की परीक्षा मे सफल होने के लिए अपना खत लिखा है ।वही मानगो के रहने वाले जहांगीर खान ने विदेश मे नौकरी के लिए अपना पासपोर्ट लगाया है। इतना ही नहीं, यहां लटकाई जाने वाली चिट्ठियों में खुदा के नाम पैगाम भी होता है। नौकरियों की अर्जी यहां सबसे ज्यादा लगती है, लेकिन कुछ और दुख-दर्द भी लिखे जाते हैं इन चिटि्ठयों में। जो खत लटके हैं, उनमें से कुछ में लोगों ने अपने घर के हालात लिख रखे हैं। कुछ चिट्ठियों बेटियों की शादी हो जाए, इसकी भी मिन्नत है। खत में किसी ने बीमारी दूर करने की गुजारिश लिखी है तो किसी ने लिखा है कि उसका पति शराब छोड़ दे।
धर्मं जाति का भेद नही
मजार मे कोई भी घर्म के लोग आ सकता है इसके लिए कोई जाति , घर्म का भेदभाव नही है। घर में कोई समारोह , शादी व अन्य किसी उत्सव पर लोग कार्ड लेकर मजार आते है।और बाबा को निमंत्रण देकर जाते है। इस दरगाह मे मुसलिम ही नही हिंदु धर्म के लोग भी आते है. और अपनी मन्नते मांगते है।
कुंए के पानी से नहाने पर मिलता है पागलपन से छुटकारा
दरगाह मे एक कुआ है बताया जाता है कि वह कुआ बाबा के हाथो से खोदा गया है। इस कुंए के पानी से नहाने से पागलपन , मंदबुद्धी से पिंड़ीत व्यक्ति स्वास्थय हो जाता है। पीर मोहम्मद ने बताते है कि चाहे कितनी भी गर्मी क्यों न पड़ जाए। पर इस कुंए का पानी नही सुखता है। पागलपन व मद बुद्धी सें पिड़ीत व्यक्ति को 11 दिन व 21 दिन तक लगातार इस पानी के स्नान करने से हमेशा के लिए स्वास्थय हो जाता है।

