
सात सूत्रों मांगोंवाला प्रबंधन को दिया ज्ञापन
दी धमकी 15 दिनों के अंदर मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो व्यापक स्तर होगा आंदोलन


जमशेदपुरः टाटा मोटर्स गेट पर भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर एक दिन का उपवास किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्य़कर्ता शामिल हुए. इसका नेतृत्व सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य धर्नुधर त्रिपाठी ने किया. साथ ही एक सात सूत्री ज्ञापन सौंप कर चेतावनी दी है कि अगर पंद्रह दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गयी, तो उग्र आंदोलन किया जायेगा, जिससे औद्योगिक शांति भंग होती है, तो इसके लिए कंपनी प्रबंधन ही जिम्मेदार होगा.
सौंपे गये सात सूत्री ज्ञापन में कहा गया है कि टाटा मोटर्स में प्रशिक्षण के नाम पर आइटीआइ प्रशिक्षुओं द्वारा बड़े पैमाने पर कराये जा रहे उत्पादन कार्य को अविलंब बंद कर प्रशिक्षण के नाम पर चल रहे गोरख धंधे से कंपनी प्रबंधन बाज आये. ज्ञापन में कहा गया कि यह कानूनी तौर पर भी गलत है और कानून की आंख में धूल झोक रही है. प्रशिक्षण की आड़ में हजारों आइटीआइ प्रशिक्षुओं से कराये जा रहे सीधे-सीधे उत्पादन कार्य को बंद कर अस्थायी व सेकंड सन के रूप में प्रशिक्षित कर्मचारी पुत्रों को काम पर रखा जाये.
ज्ञापन में कहा गया है कि जाली डिप्लोमाधारी प्रभावी लोगोंके संबंधियों को जिस तरह डी ग्रेड कर वाई जीरो ग्रेड से टीएमएसटी में समायोजित किया गया है, उसी तरह मैट्रिक प्रमाण पत्र के आधार पर निष्कासित कर्मचारी पुत्रों को जिन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली है, उन्हें भी काम पर वापस बुलाया जाये. ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशिणोपरांत तथा वर्षों की सेवा के बाद मेडिकल फिटनेस करी आड़ में स्वांग रच सुगर, ब्लड प्रेशर, ब्लाइंड व बड़ी बीमारियों से इलाज करा कर आये निष्कासित कर्मचारियों को यथोचित जगह पर समायोजित किया जाये, क्योंकि नौकरी बहाली के समय वे पूर्णतः फीट कंपनी में योगदान करने आये थे. अतः इस आधार पर वर्षों सेवा के बाद निष्कासन अमानवीय व गैर कानूनी भी है.
ज्ञापन में कहा गया है कि दस वर्षों कर स्थायी सेवा की जगह किसी भी रूप में 15 वर्षों तक सेवा कर चुके कर्मचारी पुत्रों का नियोजन सुनिश्चित किय जाये, क्योंकि कंपनी अपनी गलत नीतियों का शिकार बना वर्षों तक कर्मचारियों को स्थायी नहीं करती है, जिसका दोषी प्रबंधन ही है, न कि कर्मचारी. ज्ञापन में कहा गया है कि ट्रांसपोर्ट एलाउएंस के नाम पर 2010 के बाद स्थायी हुए लोगों के साथ भेदभाव तत्काल बंद किया जाये व पूर्व के कर्मचारियों के तहत ही इन्हें भी समानांतर लाभ दिया जाये. ज्ञापन में कहा गया है कि दक्ष कर्मचारियों के कार्योत्पादन के बाद अकुशल आइपीटी प्रशिक्षुओं द्वारा गुणवत्ता जांच की जाये व इन्हें शिफ्टों क्वालिटी डिपार्टमेंट में पदस्थापना की जाये.

