
जमशेदपुर।13जुलाई
सर्दी खांसी का शिरप तो सभी बेहिचक लेते हैं लेकिन क्या मन के बीमार होने पर कोई उपाय करते हैं।नहीं ना??अगर कोई मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास जाता है तो लोग उसे पागल समझ बैठते हैं।यही वजह है कि मानसिक रोगियों की तादाद जिस तरह बढ रही है उसका निदान नहीं हो पा रहा है।वजह ये है कि निदान तो तब होगा जब लोग डाॅक्टर के पास जाएंगे।जमशेदपुर की बात करें तो संस्था जीवन के अध्ययन के मुताबिक आतहत्या के मामले में बैंगलोर के बाद इसका दूसरा स्थान है।जाहिर है डिप्रेशन के शिकार लोगों को मदद नहीं मिल पाती।गहरे डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है।
और गहरे में जाएं तो पता चलता है मन की बीमारियों को लेकर लोगों के बीच कई गलत धारणाएं हैं।कोई जरूरी नहीं कि काऊंसलिंग के लिए आए व्यक्ति को दवा की ही जरूरत हो।जब केस थोडा क्रिटिकल होता है तब साईकैट्रिक दवाईयों की सलाह दे सकता है।लेकिन ज्यादातर मामलों में काऊंसलिंग काफी होती है और ये काम साईकाॅलोजिस्ट यानि मनोवैज्ञानिक बखूबी करते हैं।जमशेदपुर की बात करें तो यहां मनोचिकित्सक तो थोडे बहुत हैं पर मनोवैज्ञानिक न के बराबर हैं।

पर पूना में सालों तक मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में काम कर चुके क्लिनिकल साईकाॅलोजिस्ट अजिताभ गौतम आजकल जमशेदपुर में साईको शिरप काॅन्सेप्ट लेकर पहुंचे हैं।वे लोगों के बीच ये संदेश दे रहे हैं कि साईको शिरप यानि मन का शिरप लेने में न हिचकें।मन का परेशान होना कोई ऐसी शर्मनाक बीमारी नहीं जिसे छुपाया जाए।जैसे शरीर बीमार होने पर इलाज चाहिए ठीक वैसे ही
मन को भी इलाज की जरूरत होती है।मनोवैज्ञानिक अजिताभ गौतम के सामने लोग अपने मन की गांठ खोलनी पडती है।45मि के एक सेशन में ही कई बार समस्याएं सुलझ जाती हैं।मन की गांठ और परत खुलती हैं तब अजिताभ अपनी काऊंसलिंग रूपी शिरप जब मन को देते हैं तो मन ताजगी से भर जाता है।कई बार तो लोगों को छह महीने भी लग जाते हैं तो कुई लोग तीन चार सेशन में ही खुद को तरो ताज़ा महसूस करते हैं।ये शिरप कोई दवा नहीं है बल्कि बातों के माध्यम से की गई काऊंसलिंग है जो एक क्लिनिक साईकाॅलोजिस्ट बेहतर तरीके से करता है।

लौहनगरी को ऐसे साईको शिरप को समझने की जरूरत है।आखिर कब तक हम आत्महत्याओं को मूकदर्शक बनकर देखते रहेंगे।क्लिनिकल साईकाॅलोजिस्ट अजिताभ गौतम जल्द ही काॅलेज स्कूलों में जाकर नई पीढी को साईको शिरप के काॅन्सेप्ट से रूबरू कराएंगे।
तो शर्माईए नहीं मन खराब लगे तो साईको शिरप बेहिचक ले लीजिए।

