
एक ऐसी शादी


रवि झा
जमशेदपुर।
शादी के बात जैसे ही शुरु होती है तो दुल्हा हो या दुल्हा सजाने के लिए परिवार के लोग अच्छे व्युटी पार्लर की तलाश मे जुट जाते है ताकि शादी के दिन दुल्हा – दुल्हन देखने में सुदंऱ लगे। लेकिन आज भी भारत मे ऐसे कई जाति के लोग है जो इस आधुनिक युग में अपने सास्कृतिक को बचाने मे लगे है। इसी मे से एक मैथिल ब्राह्रामण का श्रोत्रिय समाज के लोग है । इस समाज से आने वाले लोग आज भी सास्कृतिक धरोहर को बचा कर रखे है। यहां पर आज भी शादी होने पर लड़के शादी के दिन अपना सिर को मुड़वा कर जाते है। और यही नही लड़कियो को भी घर मे सजाया जाता है जिसे पसाईन कहा जाता है। यही नही शादी के दिन आने वाले बारतिंयो को पैर धोकर स्वागत किया जाता है। और बारातियो को बिना नमक का खाना खिलाया जाता है।
दुल्हा को सर का बाल छिलाकर आना अनिवार्य है
शादी के दिन दुल्हा को अपने सर का बाल छिलाकर आना अनिवार्य है। इस मामले मे पण्डित माधव झा बताते है कि शादी के पहले वर का समाजिक दृष्टिकोण से कई शुभ और अशुभ कार्यो जाता है। और शादी एक य़ज्ञ होता है जिसमे दो परिवार का मिलन होता है।जो परिवार एक दुसरे को नही जानते है एक होते है।और इस यज्ञ मे भागवान स्वंय विराजमान होते है। चुकि शादी मे शुद्दिकरण की आवशयकता होती है। इसलिए यह माना जाता है कि शादी में लड़के क द्वारा बाल काटवाने लेने वह शुद्द हो जाता है।इस कारण लड़के को बाल कटवाना पड़ता है।वही दुल्हे को शादी से लेकर लगातार चार दिनो तक धोती पहन रहना पड़ता है। और धोती पहन कर ही सारी विधी विधान करना पड़ता है।
दुल्हन को भी घऱ मे सजाया जाता है
यही नही दुल्हन को भी घऱ मे सजाया जाता है। घर में मौजुद बड़े – बुर्जूग औरते के द्रारा दुल्हन को सजांया जाता है जिसे हम पसांईन कहते है। शादी के दिन दुल्हा और दुल्हन जब तक शादी नही हो जाती तब तक उपवास रहते है। शादी के बाद लगातार चार दिनो तक दोनो को बिना नमक का खाना खाना पड़ता है।
दुल्हा और दुल्हन शादी के पहले एक फोटो तक देखना मना है
इस समाज मे शादी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दुल्हा और दुल्हन शादी के पहले फोटो तक नही देखते है, लड़की के परिजन रिश्ता लेकर वर पक्ष के पास जाते है और अपने लड़की के गुण के बारे मे जानकारी देते है। रिश्ता पक्का हो जाता है। हॉ यह जरुर है वर पक्ष वाले लोग कन्या पक्ष से समय जरुर थोड़ा समय लेते है कि कन्या पक्ष के बारे जानकारी लेने के लिए। लेकिन चाह कर भी वह कन्या को नही देख पाते है। जब वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को हां कह देते है तो उसे हरधरी कहते है और वर पक्ष वाले लोग कन्या पक्ष वाले को लडके का ऱाशी और नक्षत्र देते है ताकि विवाह का तारीख तय की जा सके।
दहेज रहित होता है विवाह
इस समाज में आज भी दहेज लेने देन मना है। और कन्या पक्ष वाला को अगर कुछ देना भी है तो वे अपनी खुशी से बेटी और दमाद को देते है। किसी भी प्रकार के दहेज सबंधी बाते इस समाज में चर्चा नही होती है। हालाकि पुराना व्यवहार के अनुसार बड़े बड़े कांसे के बर्तन देने का आज भी रिती रिवाज इस समाज में है।
बरातियो का पैर धुलाकर स्वागत किया जाता
इस समाज मे जो भी बराती आते है उन सभी का पैर धोलाकर स्वागत किया जाता है। लेकिन पैर उन्ही का धोलाया जाता है जो पारंपरिक ड्रेस धोती कुर्ता और पाग पहन कर आते है। पैर धोलाने के पश्क्षात उनकी आरती भी उतारी जाती है। इसके पीछे भी तर्क है। इस सबंध मे पण्डित बताते है कि पैर का जो अगुंठा उसे धोया जाता है और अंगुठा को पत्थर पर ऱखा जाता है। उसका तर्क है कि कन्या पक्ष के लोग वर पक्ष वाले लोगो को कहते है कि आप भी इस पत्थर की तरह कठोर बने ताकि दो परिवार हमेशा के लिए एक हो जाए और हर परिस्थीति में एक दुसरे के लिए खड़े रहे।
बिना नमक का खाना मिलता है बारातियो
सबसे खास बात यह है कि इस शादी में आने वाले बारितीयो को बिना नमक का खाना मिलता है इसमे कन्या पक्ष के अपने सामर्थ्य के अमुसार 9 .,13,21 या 56 प्रकार की व्यजंन बनाते है यही नही कम से कम पांच तरह के आचार भी खाने मे शामील रहते है। लेकिन जो भी खाना मिलता है सब बिना नमक का होता है। हां ये जरुर है कि अलग से नमक जरुर दिया जाता है। इसके पीछे भी तर्क है इस सबंध मे पण्डित माधव झा ने कहा कि जो शादी हो रही है दोनो परिवार एक दुसरे को जानते नही है और जो एक दुसरे को जानते नही है तो एक दुसरे के घऱ पर नमक कैसे खांएगे। चुकि नमक खाने से सिद्ध हो जाता है इस कारण जब एक दुसरे को जांन जाएगे तो नमक खाएगे। इसलिए बारातियो के खाने मे नमक नही दिया जाता हैं।

