विजय सिंह,बी.जे.एन.एन.ब्यूरो,नई दिल्ली
लौह -इस्पात निर्माण के क्षेत्र में प्रसिध्ध पहली भारतीय निजी कंपनी जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील ने आखिर अपना यूरोप कारोबार समेटना शुरू कर दिया है. यूरोप प्लांट को टाटा ने ब्रिटेन निवासी भारतीय स्टील उद्योगपति संजीव गुप्ता को लगभग ३७०० करोड़ में बेच दिया.विश्व भर में बेहतर स्टील निर्माण और लगातार मुनाफा कमाने वाली कंपनी के रूप में जाने जानी वाली टाटा स्टील ने व्यापर का विस्तार करते हुए ३१ जनवरी – १ फरवरी २००७ को टाटा संस के तत्कालीन अध्यक्ष रतन टाटा और टाटा स्टील के तत्कालीन प्रबंध निदेशक बी.मुथुरमन के नेतृत्व में यूरोप में स्टील कंपनी का अधिग्रहण कर वैश्विक बाजार में कदम आगे बढ़ाया था.इससे कंपनी की साख बढ़ी थी और देशी कंपनी की छवि से निकल कर टाटा स्टील को बहुराष्ट्रीय कंपनी के रूप में जाने जाने लगा था. लेकिन जानकार सूत्र बताते है कि टाटा ने ब्रिटेन में बंद पड़ी स्टील कंपनी को २००७ में बाजार भाव से लगभग ४ गुणा ज्यादा कीमत पर ख़रीदा था, जिससे उसके घरेलु मुनाफे पर लगातार दबाव बना रहा.दूसरी तरफ अधिग्रहण के बाद से यूरोप प्लांट लगातार घाटे में ही चल रहा था..अंततः कंपनी ने उसे बेचने का फैसला लिया. बंदी के कगार पर पहुँच चुके टाटा के यूरोप प्लांट में कार्यरत कामगारों ने पिछले दिनों ब्रिटेन के सांसद जेरेमी कॉर्बिन के नेतृत्व में एक दिन में एक लाख से अधिक लोगों ने याचिका दायर कर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन और उनकी सरकार से टाटा स्टील यूरोप प्लांट को बंद होने से बचाने की अपील की थी. संजीव गुप्ता की लिबर्टी ग्रुप कंपनी ने अधिग्रहण के साथ ही उत्पादन कार्य शुरू कर कर्मचारियों को संशय की स्थिति से उबार दिया है
