जामताङा—जिले में कुल 1130 घटनाएं घटित हुई

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चोरी, हत्या और बलात्कार की घटना सर्वाधिक

अजीत कुमार.जामताङा,03 जनवरी

आने वाले साल को सलाम, जाने वाले वाले साल को सलाम। यह मशहूर फिल्मी धुन बरबस लोगों के जेहन में घूमने लगा है। खट्टी मीठी यादों से भरी पुराने वर्ष 2014 काे लोग विदा कर नए साल 2015 का स्वागत कर रहें है। उम्मीद की एक नई रौशनी के आशा में लोग पुरानी यादों को सहेज कर स्वागत कर रहें है। कई के चेहरे पर उमंग है तो कुछ आंखे भरी हुई है। कहीं दर्द छुपा है तो कोई इस उम्मीद में है कि आने वाला समय बीते साल से भी बेहतर हो। हर कोई बेहतर सपनों के साथ नए साल में प्रवेश कर रहें है। फ्लैश बैक में जाए तो जामताड़ा जिला में कई ऐसी यादें है जो नासूर की तरह लोगों के मन में है। कई आपराधिक घटनाएं ऐसी घटित हुई लजो जिले को शर्मसार करने के लिए काफी है। उम्मीद कर रहें है कि आने वाले वर्ष में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति नही हो।

वर्ष 2014 के अपराधिक आंकड़ों पर गौर करे तो नवंबर माह तक जामताड़ा जिले के विभिन्न थाने क्षेत्रों में कुल 1130 अपराध हुए है। कई घटनाओं में पुलिस को अप्रत्याशित सफलता भी मिली। कई कांड का उद्भेदन हुआ है। लेकिन घटनाएं तो घटी है। जिले में अपराध का ग्राफ बढ़ा है। पहले पायदान पर जामताड़ा में चोरी विशेषकर वाहन चोरी की घटना घटी है। 11 माह में जिले में कुल 113 चोरी के मामले दर्ज किए गए है। जिनमें कुछ मामलों का हीं उद्भेदन किया जा सकी है। दूसरे पायदान पर दंगा की बारदात हुई। जिले में कुल 91 मामले थाने में दंगा के दर्ज किए गए। जिसे पुलिस, प्रशासन और सामाजिक पहल से शांत कराया गया। तीसरे पायदान पर सामान्य अपहरण और बलात्कार की घटना घटी। पूरे जिले में सामान्य अपहरण के 27 और बलात्कार के भी 27 मामले दर्ज किए गए। वहीं फिरौती के लिए अपहरण की एक घटना घटित हुई है। जबकि चौथे पायदान पर गृह भेंदन के मामले रहें है। जिले में गृह भेदन के 25 कांड दर्ज किए गए है। हत्या के 17 मामले जिले भर में सामने आए है। जबकि दहेज संबंधी हत्या के 8 घटनाओं को दर्ज किया गया है। वहीं लूट की 9 घटनाओं को अपराधियों ने अंजाम दिया है। जबकि डकैती की 2 घटना घटित हुई है। इसके अलावा अन्य प्रकार के 810 मामले विभिन्न थाने में दर्ज किए गए है जिसे विविध श्रेणी में रखा गया है।

अगर वर्ष 2014 पर नजर दौड़ाई जाए तो यह साल अपराधिक घटनाओं के लिए याद किया जाएगा। कई ऐसे कांड हुए जो सुर्खियों में बना रहा। दिन दहारे बीच शहर में हुई हत्या की घटना आज भी चौक चौराहों पर चर्चा में है। फिरौती के लिए अपहरण की घटना हो या फिर करमाटांड़ थाना क्षेत्र में लगातार अंतराल पर हुई सांप्रदायिक तनाव का मामला। ये घटनाएं लोगों की यादों और चर्चा से बाहर अब तक नही निकल पाया है। बावजूद इसके लोग सब कुछ भूलकर नए साल के स्वागत में खड़े है। उम्मीद है कि वर्ष 2015 की पहली किरण लोगों के लिए नई खुशियां, नई उम्मीद और नया सबेरा लेकर आएगा।

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