जमशेदपुर। वयोवृद्ध सर्वोदयी नेता, जमशेदपुर प. विधानसभा क्षेत्र से 1977 में विधायक व बिहार सरकार के बीस सूत्री कार्यक्रम के उपाध्यक्ष रहे मो. अयूब खान का निधन ह्रदयगति रुकने के कारण 24 दिसम्बर 2015 को अहले सुबह 3.40 बजे हो गया, वे हृदय रोग से पीड़ित थे।
सर्वविदित है कि विगत साठ वर्षों के सक्रिय जीवनकाल में उन्होने अपने को सामाजिकता से जोड़कर रखा, सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान रही और वे समाजसेवा के कार्यों से निरन्तर जुड़े रहे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के आदेश पर उन्होने मई 1965 में जमशेदपुर में अपना पड़ाव डाला और उसके बाद उन्होने जमशेदपुर को ही अपनी कर्मभूमि बनायी। इसी कड़ी में वे गांधी शान्ति प्रतिष्ठान के सचिव व अध्यक्ष बनें, जिसके माध्यम से इन्होने सामाजिक समरसता बढाने व सद्भाव फैलान का कार्य किया। इन्हें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर का भी सानिध्य प्राप्त हुआ, जिनके भारतयात्रा के दौरान कन्याकुमारी से दिल्ली तक वे उनके साथ यात्रा में शामिल रहे। 1974 का जेपी आन्दोलन इनके जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव लाया, जब इन्होने जमशेदपुर में जेपी आन्दोलन को बल प्रदान किया, जिसके कारण इन्हें आपातकाल में मीसा लगाकर जेल की सजा हुई जहां 19 महीनों तक ये जेल में रहे, इनके नेतृत्व क्षमता के कारण इन्हे समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया गया तथा इनके सौहार्दपूर्ण एवं सर्वमान्य नेता गुण के कारण जमशेदपुर पश्चिम की जनता ने इन्हें 1977 में विधायक चुना। आज भी ये सर्व प्रिय नेता के रूप में जाने जाते हैं तथा इन्हें चाहने वाले हर राजनीतिक दल में हैं।
स्व. अयूब खान का अंतिम संस्कार इस्लामिक रीतिरिवाज से सम्पन्न होगा। 25 दिसम्बर को प्रातः 10 बजे इनके पार्थीव शरीर को टीएमएच से इनके निवास स्थान गांधी शान्ति प्रतिष्ठान में आम लोगों के दर्शनार्थ रखा जाएगा, जहां से 12 बजे इनका शव धतकीडीह बड़ी मस्जिद में जुमा व जनाजे की नमाज के लिए ले जाया जाएगा जहां से धतकीडीह कब्रिस्तान में 1.30 बजे मिट्टी में दफनाया जायेगा।
