
स्टील एक्सप्रेस नए रुप में 11जून से , तैयारी पुरी
जमशेदपुर।
टाटा-हावड़ा स्टील एक्सप्रेस (12813-12814) में अगामी 11 जून से एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच लगेंगे। एस ई रेलवे के द्रारा उन नए कोचो का टेक्नीकल जॉच कर पुरी कर ली गई। इस नए कोच को चलाने की तिथी की भी घोषणा एस ई रेलवे के द्रारा कर दिया गया है। एस ई रेलवे के द्रारा घोषित तिथी के अनुसार यह ट्रेन 11 जून से हावड़ा से 12 जून से टाटानगर अप-डाउन करेगी।इसके साथ ही स्टील एक्सप्रेस चक्रधरपुर रेल मंडल की पहली ट्रेन एलएचबी युक्त कोच वाली होगी। इस बात की पृष्ठि दक्षिण पूर्व रेलवे के मुख्य जनसर्पक अधिकारी संजय घोष ने की है।
सुरक्षित व आरामदेह
उन्होने बताया कि यह कोच पुरी तरह अत्याधुनिक होगा। इस कोच के लगजाने से ट्रेन की रफ्तार भी बढेगी। उन्होने बताया कि जर्मनी से प्राप्त तकनीक के आधार पर अत्याधुनिक एलएचबी कोच का निर्माण किया गया है।लिंक हॉफमैन बुश तकनीक से कोच निर्माण में स्टील और एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया गया है। उन्होने बताया कि एलएचबी कोच के कारण यात्रियों को ट्रेन की तेज स्पीड के बावजूद झटके नहीं लगेंगे। आरामदेह के साथ एलएचबी कोच सुरक्षा के तहत भी बेहतर है। दुर्घटना होने पर एलएचबी कोच एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते। इससे जानमाल का नुकसान कम होता है।
प्रतिदीन इस ट्रेन से 6 हजार से ज्यादा करते है यात्री सवारी
स्टील एक्सप्रेस में के इस नए रैक में 22 कोच (एसी चेयरकार, सामान्य श्रेणी के आरक्षित व जनरल कोच) होंगे।जिसम वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के एक, वातानुकूलित थ्री टायर के एक ,वातानुकूलित कुर्सीयान -3 ,आरक्षित कुर्सीयान-09 और अनारक्षित कुर्सीयान के 6 और दो जेनलेटर यान शामील है।
रेलवे की नई व्यवस्था से हावड़ा व टाटानगर-खड़गपुर से रोज अप-डाउन करने वाले करीब 6 हजार यात्रियों को नई सुविधा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि जमशेदपुर वासियो के लिए स्टील एक्सप्रेस काफी महत्वपूर्ण ट्रेन है। यह ट्रेन से लोग सुबह हावड़ा मार्केटिग करने के लिए जाते है । और रात को फिर इसी ट्रेन से लौट जाते है। य़ह ट्रेन जमशेदपुर वासियो के लाईफ लाईन के नाम से जाना जाता है।
स्टील एक्सप्रेस से हटेगी पेंट्रीकार
टाटा-हावड़ा स्टील एक्सप्रेस से पेंट्रीकार हटेगी, क्योंकि, एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच वाली ट्रेनों में पेंट्रीकार का प्रावधान नहीं है। इससे यात्रियों को चलती ट्रेन में खानपान का सामान खरीदने में भी दिक्कत होगी। लेकिन, पेंट्रीकार ठेकेदार कहीं बाहर से नाश्ता बनवाकर ट्रेन में चढ़ा सकता है।हालाकि पुरानी रैक मे पैट्रीकार व्यवस्था रहने के कारण यात्रियो को खान पान में दिक्कते नही होती है।

