
जमशेदपुर।
खाद्य आपूर्ति एवं संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय आज जमशेदपुर से रांची जाने के क्रम में कांड्रा-चौका रोड पर पालगम स्थित नाला पर बने पुल पर रुक का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्य देखने गए मगर वहां न तो कोई इंजीनियर था और न ही ठेकेदार का कोई आदमी, जो यह बता पाता कि पुल टूटने की वजह क्या थी और इसकी मरम्मत का काम कैसे चल रहा है। सिर्फ कुछ मजदूर ढलाई के लिए छड़ बांध रहे थे।
मंत्री ने कहा कि जैसे अभी मरम्मत कार्य की देखरेख करने के लिए कोई अभियंता या जिम्मेवार व्यक्ति नहीं है, वैसे ही पुल के निर्माण के समय भी इसकी देखरेख के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं रहा होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने जेएआरडीसीएल को काम दिया, उसने इसे जीकेसी को दे दिया और जीकेसी ने किसी पेटी कॉन्ट्रैक्टर से काम करा लिया। इस प्रकार पुल निर्माण का पैसा चार जगह बंट गया, जिसका सीधा असर पुल के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर दिखाई दे रहा है। पुल के दोनों ओर सड़क पर भी दरार आ गई है। मंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि जेएआरडीसीएल सफेद हाथी बन गया है, जिसे बिना कुछ काम किये सिर्फ कमीशन खाने से मतलब है। उन्होंने पुल निर्माण में लापरवाही को गंभीर मामला बताया और कहा कि वह रांची जाकर संबंधित विभाग से पुल के इतनी जल्दी धंसने और इसके जिम्मेदार लोगों पर की गई करवाई की बाबत जानकारी लेंगे।
इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि कुछ महीने पहले ही यह पुल बना था और इसके बीच में गढ्ढा हो गया था। कुुुछ दिन पहले इसी पुल के नीचे बने डाईवर्सन पर नाले का पानी चढ़ जाने के कारण मंत्री को दो घन्टे फंसे रहना पड़ा था।
पुल निर्माण करानेवाली एजेंसी झारखंड एक्सीलरेटर रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (जेएआरडीसीएल) के अभियंता मधुर मित्तल ने फोन पर बताया कि पुल के बीच में एक लंप आ गया था, इस कारण उसे तोड़कर फिर से मरम्मत कराई जा रही है। यह पूछे जाने पर कि पुल का निर्माण कब हुआ था, उन्होंने कहा कि 2014 में जीकेसी नामक कंपनी ने पुल का निर्माण कराया था, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष 2016 में या पुल बना और चालू होने के कुछ महीने बाद ही इसमें गड्ढा और दरार आ गई।

