
संतोष कुमार


जमशेदपुरः कर चले हम फिदा जानों तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों….. की इस अमर पंक्तियों को बीएसएफ का जवान देश की सीमा पर शहीद होनेवाला किशन कुमार दुबे चरितार्थ कर गया. जी हां, रविवार को शहर के हजारों नव जवानों, किशोरं, बुजुर्गों ने अपनी छलकती आंखों से शहीद किशन को चिता पर सुला कर विदा किया. इस बीच भारत माता की जय, जब तक सूरज-चांद रहेगा किशन तेरा नाम रहेगा,,, नारे गूंजते रहे. वैसे तो शहर के लोगों में देश भक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा है. जब-जब देश पर किसी प्रकार की मुसीबत आयी है, यहां के लोगों ने जाति, धर्म, क्षेत्र, प्रांत से ऊपर उठ कर अपनी एकता व भावना प्रदर्शित की है, लेकिन शहीद किशन की शहादत पर ऐसा जज्बा दिखेगा, यह अकल्पनीय था व अद्यूतीय था. यह वर्षों तक याद किया जायेगा. ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि कल्पना से परे हो गया. ऐसा देश भक्ति का जज्बा उमड़ा कि इतिहास बन गया. भूतो न भविष्यति. जी हां, यही तो दिख रहा था रविवार को. जिधर देखो उधर किशन की शहादत की चर्चा. किशन की वीरता का बखान
किशन का पार्थिव शरीर तो शनिवार को ही आठ बजे शाम शहर पहुंच गया था. किशन के पार्थिव शरीर को टाटा मुख्य अस्पताल में रखा गया.
अगले दिन यानी रविवार की सुबह आठ बजे किशन के पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शनार्थ दुर्गा पूजा मैदान ले जाया गया. यहां भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े अपने प्यारे शहीद बेटे को देखने के लिए. लोगों में भारी गुस्सा व आक्रोश भी फूट रहा था. पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगने लगे. पाकिस्तान होश में आओ…. पाकिस्तान मुर्दाबाद…… आदि के नारे लगने लगे, जिससे माहौल में तल्खी भी आ गयी. लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ क्षोभ, आक्रोश, गुस्सा साफ झलक रहा था. दुर्गा पूजा मैदान में एक बेदी बना कर किशन के पार्थिव शरीर को राखा गया था. पूरा मैदान तिरंगे झंडे से पट गया था.
मुख्यमंत्री समेत कई लोग पहुंचे
अंतिम दर्शनार्थ मुख्यमंत्री समेत कई नेता पहुंचे, जिनमें मंत्री सरयू राय, सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक रामचंद्र सहिस, विधायक मेनका सरदार, आजसू नेता चंद्रगुप्त सिंह, सरदार शैलेंद्र सिंह, विजय खान, आनंद बिहारी दुबे, राकेश्वर पांडेय, पूर्व विधायक रामदास सोरेन, पूर्व विधायक अरविंद सिंह, आर्मी के कर्नल सौरभ कुमार शर्मा, लेफ्टीनेट कर्नल एबी सिंह, कैप्टन दीप श्रीवास्तव (एवियेटर), दोनों जिले के एसपी, एसएसपी, पूर्वी सिंहभूम के डीसी, एसडीओ, रघुनाथ पांडेय समेत लगभग सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों श्रद्धांजलि दी. इस दौरान मैदान में उपस्थित लोगों के हर हाथ में तिरंगा लहरा रहा था.
करीब 11 बजे निकली शवयात्रा
घरेलु विधि- विधान के साथ शहीद किशन की पार्थिव शरीर की निकली शव यात्रा. इस दौरान किशन के परिजनों का बुरा हाल था. महिलाएं बेहोश हो जा रही थीं. माता – पिता समेत भी परिजन गमगीन थे. इसके बाद वहां से शव यात्रा निकली, भीड़ इतनी थी कि दो किमी से भी लंबी लोगों की कतार थी. लोग नारे लगाते चल रहे थे कि जब तक सूरज चांद रहेगा, किशन तेरा नाम रहेगा…., भारत माता की जय…. पाकिस्तान होश में आओ….. शव यात्रा में इतनी भीड़ थी कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था थम गयी थी.
पार्वती घाट में गार्ड ऑफ ऑनर दी गयी
पार्वती घाट में गार्ड ऑफ ऑनर की तैयार की गयी थी. प्रदेश मुख्यालय से आये बीएसएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर (गारद सम्मान) दिया. इस दौरान शोक धुन बजाया गया. 21 गोलियों से दी गयी अंतिम सलानी. जब शव यात्रा कीताडीह दुर्गा पूजा मैदान से निकल कर स्टेशन रोड होते हुए, जुगसलाई मुख्य सड़क से होते हुए पार्वती घाट पहुंची. इस दौरान हजारों लोगों का जन सैलाब उमड़ा रहा. यहां पर बड़े भाई कन्हैया दुबे ने मुखाग्नि दी. भीड़ इतनी अधिक थी कि परिजन अंतिम संस्कार का रीति-रिवाज भी नहीं निभा पा रहे थे. तब परिजनों ने प्रशासन से व्यवस्था नियंत्रित करने का अनुरोध किया. इसके बाद सेना ने कमान संभाला और स्थिति को नियंत्रित किया. इसके बाद रीति-रिवाज संपन्न हो पाया.
पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्य व एनएनसी के कैडेट्स रहे मुस्तैद
पूर्व सैनिक सेवा परिषद् के सदस्य व पदाधिकारी तथा एनसीसी के कैडेट्स रविवार सुबह से ही शोक संतप्त परिवार के साथ लगे हुए थे. सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए भीड़ को नियंत्रित करने में तथा विधि-व्यवस्था बनाये रखने में अहम भूमिका नस्था बनाये रखने में अहम भूमिका निभायी.
एसएसपी, एसपी आदि पदाधिकारियों ने भी दी अंतिम सलामी
पार्वती घाट पर जिले के डीसी डॉ अमिताभ कौशल, एसएसपी अनुप टी मैथ्यू, सिटी एसपी चंदन झा, सरायकेला खरसावां के एसपी इंद्रजीत महथा समेत कई आला अधिकारियों ने किशन को अंतिम सलामी दी.
पार्थिव शरीर को फूल-मालाओं से लाद दिया लोगों ने किशन के पार्थिव शरीर को लोगों ने फूल-मालाओं से लाद दिया था. हर चौक- चौराहों पर लोग फूल-माला लिये खड़े थे. जिस-जिस चौक – चौराहे से शव यात्रा गुजरी लोगों ने देश पर न्योछावर होने वाले सपूत किशन के शव को फूल-मालाओं से लाद दिया और अपनी खिरादे अकीदत पेश की.

