
संवाददाता जामताड़ा


लगभग ८० के उम्र में अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रही है रानी बाला दास. जीने का जज्वा ऐसा की अधिकार की लड़ाई अंतिम समय भी लड़ रही है. लेकिन सरकारी महकमा ऐसा है की इन्हें दो जून रोटी के लिए लगभग डेढ़ वर्ष से अंचल कार्यालय का चक्कर लगवा रही है. डेढ़ वर्ष पूर्व नाला अंचल कार्यालय ने इनका पेंसन रोक दिया. जब अंचल पता लगाने गई तो वृद्धा का नाम ही सूचि से गायब कर दिया गया था. रानी ने लड़ाई जारी राखी और पहुँच गई उपायुक्त कार्यालय.
सोमवार को उपायुक्त शशिरंजन सिंह हतप्रभ रह गए जब लाठी के सहारे लड़खड़ाते कदम से अपने पेंसन की गुहार लगाने रानी बाला दास पहुंची. साथ में बांदरडिहा पंचायत के मुखिया भी थे. पूछने पर बताया की सामाजिक शुरक्षा के तहत उक्त महिला को वर्ष १९९९ से पेंसन मिल रहा था लेकिन नवंबर २०१३ से इनका पेंसन बंद कर दिया गया. अंचल का लगातार चक्कर काटने के बाद बताया गया की सूचि में नाम नहीं है.
जिला में यह अकेला मामला नहीं है. ऐसे कई मामले पड़े है लेकिन किसी का ध्यान नहीं ज रहा है. रानी बाला के साथ ही एन अन्य बुजुर्ग भूतनाथ गोराई भी इसी सिलसिले में उपायुक्त से मिले. दोनों नाला प्रखंड के बांदरडीहा पंचायत के पिपला गांव के है. ऐसे में सवाल उठता है की जब एक दशक से पेंसन मिल रहा है तो अचानक सूचि में से नाम कैसे गायब हो गया.
इस सन्दर्भ में डीसी शशिरंजन सिंह ने अंचलाधिकारी को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. साथ ही संबंधित मामले में दोषी कर्मचारी व पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

