
मामला चिटफंड कंपनी कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज द्वारा 300 करोड़ की धोखाधड़ी का
संवाददाता
जमशेदपुरः रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया की प्रदेश महासचिव हेमा घोष ने चिटफंड कंपनी कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज द्वारा झारखंड के हजारों निवेशकों से 300 करोड़ रुपये मामले में कहा है कि पहले निवेशकों की राशि लौटायी जाये, फिर जांच करायी जाये. यह बातें श्रीमती घोष ने यहां मंगलवार को साकची स्थित अशोका इन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही. उन्होंने कहा कि घोटाला सामने आने के बाद सेबी ने उक्त कंपनी पर बैन लगा दिया है, लेकिन इससे निवेशकों को क्या लाभ हो रहा है. दरअसल पहले निवेशकों की राशि लौटाने की व्यवस्था सेवी करे, फिर जांच की बात करे. श्रीमती घोष ने जानकारी दी कि उक्त कंपनी द्वारा 26 मई 2009 को व्यापार प्रारंभ करने की अनुमति प्राप्त की गयी. यह कंपनी शोध पूर्वाधिकार अंश व एडवांस प्रोडक्ट स्कीम के जरिये निवेशकों से पैसा उगाही करना शुरू किया. कंपनी के सीएमडी शाहजहां खान ने बेरोजगारों को रोगजार देने के नाम पर रोजगार शुरू किया. इसके बाद कई बेरोजगार एजेंट के रूप में इस कंपनी से जुड़े. सीएमडी के अनुसार निवेशकों से लिया गया पैसा होटल एवं रिसोर्ट, पैकेज ड्रिंकिंग वाटर प्लांट, रियल स्टेट, पीवीसी पाइप इंडस्ट्रीज, बकरी पालन आदि में लगाया जाना था. उनका यह भी कहना था कि रिडिनेबल, प्रिफ्रेंशिययल शेयर एक सुरक्षित निवेश है और उन लोगों ने सरकार को गारंटी दे कर यह निवेश लेने की अनुमति प्राप्त की है. यदि व्यापार में घाटा भी होता है, तो उनके द्वारा गारंटी के रूप में सरकार के पास जो संपत्ति जमा करायी गयी है, उससे निवेशकों को सही समय पर राशि मिल जायेगी. इसी बात से प्रेरित हो कर एजेंट के रूप में लाखों लोग जुड़े. विगत चार वर्षों में उक्त कंपनी अपना कारोबार बंगाल के साथ बिहार, झारखंड उत्तर प्रदेश, असम, ओडिशा, महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक अपना कारोबार बढ़ाया.
श्रीमती घोष ने बताया कि अचानक सेबी ने 14 अगस्त 2013 को कंपनी को नोटिस जारी कर निवेशकों से पैसा उगाही पर रोक लगा दी. सेवी ने यह कह कर कंपनी पर रोक लगायी कि बगैर सेबी की अनुमति के उक्त कंपनी निवेशकों का पैसे की उगाही कर रही है. कंपनी को 50 से ज्यादा निवेशकों से पैसे लेने की अनुमति नहीं है. इस असलियत का पता चलने पर निवेशक सकते में आ गये. इसके बाद निवेशक व एजेंट कंपुनी के हेड ऑफिस व शाखा कार्यालयों का चक्कर लगाने लगे. हर जगह से उन्हें यही सुनने को मिलता था कि सेबी से आदेश प्राप्त होते ही निवेशकों की बकाया राशि लौटा दी जायेगी. 30 अप्रैल 2014 को सेबी ने कंपनी को पैसा लौटाने का आदेश भी दिया. उस आदेश में कहा गया था कि तीन माह के अंदर राशि लौटायी जाये, लेकिन यह राशि अब तक नहीं दी गयी है. निवेश हैरान-परेशान हैं. उल्टे राशि मांगने पर कई निवेशकों को सीएमडी के भाई द्वारा पीटा गया. जिन लोगों ने काम करने से मना किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी तक दी गयी.
एक सवाल के जबाव में श्रीमती घोष ने बताया कि कुल 11 निदेशक हैं, जिनमें सीएमडी भी शामिल हैं. श्रीमती घोष ने बताया कि उन्होंने मुंबई जा कर निदेशकों से बात की, सभी का कहना था कि वे भी सीएमडी शाहजहां खान के पीड़ित हैं. उन्हें भी ठगा गया है. हालांकि एक निदेशक ने कहा कि उन्हें जो कंपनी से दो फीसदी राशि मिली है, उसे वे लौटाने को तैयार हैं. साथ ही निवेशकों को धीरे-धीरे और पैसा लौटाने का वादा करते हैं, लेकिन कुल मिला कर स्थिति यह है कि अब तक एक नया पैसा निवेशकों को नहीं मिला है. श्रीमती घोष का कहना था कि सेबी ने आनन-फानन में कंपनी के व्यवसाय पर रोक तो लगा दिया, लेकिन निवेशकों का पैसा लौटाने में कोई गंभीर पहल नहीं की.
संवाददाता सम्मेलन में गोविंदो दास, मनोज बरुआ, कविता दास, मुक्ति बरुआ के अलावा कंपनी के एजेंट व निवेशक जयंत कुमार जेठी, अजय कुमार, ओम प्रकाश पाठक, शमशाद आलम, इरफान अंसारी, अशोक कुमार साहू, मो जावैद, संतोष गिरि, संतोष शर्मा, कमाल अंसारी, दशरथ पाल व मो इब्राहिम मौजूद थे.



