

जमशेदपुर ।
रघुवर सरकार आदिवासी-मूलवासी विरोधी तो है जिसने सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन किया लेकिन आदिवासी और मूलवासियों के उससे बड़े दुश्मन आदिवासी मंत्री -सांसद – विधायक है जो विपक्ष में रहते हुए सिर्फ दिखावे और अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिए रघुवर सरकार का विरोध कर रहे हैं। उक्त बातें आज एक संवाददाता सम्मेलन में पूर्व सांसद सह आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहीं। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी सांसद-मंत्री-विधायक सही में आदिवासी मूलवासियों के हितैषी हैं तो उन्हें अविलंब सरकार से इस्तीफा दे देना चाहिए था। इनके मौन समर्थन के कारण ही रघुवर सरकार इस कानून में संशोधन कर पायी। उन्होंने कहा कि रघुवर एक आदमी है, वे राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन वे मुख्यमंत्री के पद पर इसलिए बैठे हुए हैं कि आदिवासी विधायक उनका साथ दे रहे हैं। यदि आदिवासी विधायकों का साथ उन्हें नहीं मिले तो सरकार एक मिनट भी नहीं बने रह सकती।
कम समय नहीं मिला आदिवासियों को
उन्होंने कहा कि झारखंड के गठन के बाद के 14 साल सिर्फ आदिवासी नेताओं को ही मिले हैं। आदिवासी नेता ही विधायक मंत्री और मुख्यमंत्री तक इन 14 वर्षों में रहे हैं। यदि इन्हें राज्य और आदिवासी-मूलवासियों की चिंता होती तो आज राज्य की न तो इतनी दुर्दशा होती और न ही रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलता। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को जाति, धर्म, क्षेत्र आदि के बंधन से ऊपर उठकर अपनी लड़ाई खुद लडऩी पड़ेगी तभी आदिवासी-मूलवासियों का अस्तित्व बचा रह सकता है। तात्कालिक समाधान के लिए आदिवासी एमएलए और एमपी को मजबूर करना होगा क्योंकि वे ही समस्या भी हैं और समाधान भी। उन्होंने कहा कि प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते झामुमो के सभी विधायक सामूहिक इस्तीफा देकर झारखंडी जनता के बीच आकर अनिश्चितकालीन असहयोग जनांदोलन खड़ा करें क्योंकि वे टीएसी और विधानसभा में रह कर भी समाधान नहीं दे पा रहे हैं। इस्तीफा देकर जनांदोलन को यदि वे नई उर्जा देंगे तो 6 महीने के भीतर ही वे फिर से विधानसभा में वापस आ जाएंगे और भाजपा के झारखंडी विधायकों पर भी भारी दबाव बनेगा।
झारखंडी जनता को परिणाम चाहिए बंद नहीं
उन्होंने कहा कि बंदी, नाकेबंदी, राज्यपाल को ज्ञापन, रैली, महारैली आदि से परिणाम नहीं निकल रहा है। इससे फायदा सिर्फ पार्टियों और नेताओं को हो रहा है जनता को नहीं। इसलिए अब पार्टियों और नेताओं को वोटबैंक की राजनीति छोडऩी होगी।
झारखंडी सत्याग्रह मोटरसाईकिल रैली 12 से
उन्होंने कहा कि वे अपनी बातें आदिवासियों और मूलवासियों के बीच रखने के लिए आगामी 12 दिसंबर से बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु से झारखंडी सत्याग्रह मोटरसाईकिल रैली की शुरूआत करेेंगे। इस रैली के माध्यम से वे अपनी बातें राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर आदिवासियों और मूलवासियों के बीच रखेंगे। इस रैली का समापन 22 दिसंबर को सिदो मुर्मू क ी जन्मस्थली भोगनाडीह में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उलिहातु जाने के लिए करनडीह से वे लगभग 200 मोटरसाईकिलों के साथ 10 दिसंबर को दिन के 12 बजे प्रस्थान करेंगे।

