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Home » जमशेदपुर-आदित्यपुर क्षेत्र की दर्जनों बस्तियों को कब मिलेगा मालिकाना हक
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जमशेदपुर-आदित्यपुर क्षेत्र की दर्जनों बस्तियों को कब मिलेगा मालिकाना हक

BJNN DeskBy BJNN DeskJune 24, 2015No Comments5 Mins Read
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बस्तियों में रहनेवाले हजारों लोग मुख्यमंत्री रघुवर दास पूछ रहे हैं सवाल
उन्हें सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र की 86 बस्तियों की चिंता, बाकी कहां जायेंगे
ब्यूरो चीफ
जमशेदपुरः जैसे ही खबर मिली है कि आवास बोर्ड अवैध बस्तियों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करनेवाला है, वैसे ही आदित्यपुर क्षेत्र में वर्षों से बसी दर्जनों बस्तीवासियों में हजारों लोग आक्रोश से भर गये हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास को सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र की 86 बस्तियों की ही चिंता है, बाकी झारखंड की अन्य इस प्रकार की बसी बस्तियों की चिंता नहीं है. अगर बस्तियों को उजाड़े जाने की जरा भी कोशिश होगी, तो व्यापक स्तर पर विरोध किया जायेगा.
जैसा कि विदित है कि आदित्यपुर क्षेत्र में चालीस-पचास सालों से कई बस्तियां बसी हुई हैं, जो सरकार की नजर में अवैध मानी जाती है. कुछ बस्तियां आवास बोर्ड, तो कुछ रेलवे की जमीन पर, तो कुछ बिहार सरकार तथा कुछ वन भूमि में बसी हैं. इन बस्तियों में हजारों लोग निवास करते हैं. इन बस्तियों में मुख्य रूप से बनतानगर, सालडीह, राम मड़ैया बस्ती, बाबाकुटी आश्रम कॉलोनी, बास्को नगर, चंपई नगर, विद्युत नगर, बेलडीह, लंका बस्ती, बाउरी बस्ती, आंबेडकर नगर, इंदिरा बस्ती समेत खरकई नदी के किनारे कई बस्तियां बसी हुई हैं, जिनमें हजारों लोग निवास करते हैं. इन बस्तियों अधिकांश बीपीएल परिवारों व निम्न आयवाले व्यक्ति निवास करते हैं, जो दैनिक मजदूरी तथा इंडस्ट्रीयल एरिया, आदित्यपुर मे ठीका मजदूर के रूप में काम करते हैं.
जाहिर है कि इतनी बड़ी संख्या बस्तियों को हटाया जाना अथवा खाली कराया जाना, कोई आसान काम नहीं होगा. ऐसे में इन बस्तियों को नियमित करने में भला है. इससे राज्य सरकार को राजस्व भी आयेगा. साथ ही केंद्र व राज्य सरकार का जो सपना है कि सबको घर उपलब्ध कराना है, वह भी पूरा हो जायेगा.
हालांकि कई बार इन बस्तियों को मालिकाना हक के लिए धरना-प्रदर्शन-ज्ञापन का सिलसिला पूर्व में चल चुका है, लेकिन इतना बड़ा फैसला लेने में सरकार रूचि नहीं ले रही है. बस्तीवासियों का कहना है कि रघुवर दास आज अगर मुख्यमंत्री हैं, तो इसके पीछे उनका अपने विधानसभा क्षेत्र में 86 बस्तियों को लेकर किया गया आंदोलन है. आज वही मुख्यमंत्री बन गये, तो बस्तियों को उजाड़ने की बात करने लगे हैं. अगर ऐसी किसी भी प्रकार की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो उसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जायेगा. इसके स्वर अभी से ही फिजाओं में गूंजने लगे हैं.
जन विरोधी बयान दे रहे हैं रघुवर दासः देबु चटर्जी
सरायकेला खरसावां कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देबु चटर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास जनविरोधी बयान दे रहे हैं. श्री दास ने कहा कि वे जिस आवास बोर्ड पर बसी बस्तियों को खाली कराने की बात कर रहे हैं, वे दरअसल आवास बोर्ड की जमीन है ही नहीं. आवास बोर्ड ने तो अब तक एक नया पैसा भी नहीं दिया है, फिर आवास बोर्ड की जमीन कैसे हो गयी. अगर खाली करायी जाती है, तो इसका जबरदस्त रूप से विरोध किया जायेगा. श्री चटर्जी ने कहा कि बस्तियां तो तब से बसी हैं, जब रघुवर दास का जन्म भी नहीं हुआ था. सच तो यह है कि उन्हें तो बस अपने विधानसभा क्षेत्र की86 बस्तियों की ही चिंता है, बाकी की नहीं. उसमे तुर्रा यह है कि विगत बीस साल से 86 बस्तियों की एक इंच भूखंड को मालिकाना हक नहीं दिला सके. अब जब मुख्यमंत्री बन गये हैं, तो संचिका-संचिका खेल रहे हैं. मालिकाना हक नहीं दे रहे.
पुनर्विचार करना चाहिए, बयानों से सीएम को बचना चाहिएः देव प्रकाश
राजद के प्रदेश महासचिव देव प्रकाश देवता ने कहा कि बस्तियों को खाली कराने से पहले पुनर्विचार करना चाहिए व रघुवर दास को ऐसे बयानों से बचना चाहिए. श्री प्रकाश ने कहा कि इन बस्तियों में लोग काफी दिनों से रह रहे हैं. बसाने की बात होनी चाहिए न कि उजाडे जाने की.
बस्ती को उजाड़े जाने की बात नहीः सतीश शर्मा
भाजपा नेता सतीश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयानों का मतलब गलत निकाला जा रहा है. मुख्यमंत्री आवास बोर्ड के अंतर्गत पार्क, मैदान, नाली, गली आदि ने जो कब्जा कर रखा है, उसे खाली कराने की बात की जा रही है, न कि किसी बस्ती को उजाड़े जाने की. श्री शर्मा का कहना था कि आवास बोर्ड की जद में तो कोई बस्ती आती ही नहीं है. यह तो झारखंड सरकार, वन विभाग के जद में आती है.
सीएम अनर्गल बयान दे रहे हैः शारदा देवी
जेवीएम की प्रदेश नेता शारदा देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास जब से सीएम बने हैं, तब से ही अनर्गल बयान दे रहे हैं. बस्तियों को उजाड़ेंगे, तो बस्तीवासी उन्हें ही राज्य से उखाड़ फेकेंगे. गरीब – गुरबों को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जायेगा.
बसी बस्तियों को उजाड़ने की बात न होः बाबूलाल सोरेन
झामुमो केंद्रीय महासचिव बाबूलाल सोरेन ने कहा कि अव्वल तो बस्तियों की जांच होनी चाहिए कि बस्तियां कब से बसी हैं और उसे नियमित की जानी चाहिए. उजाड़ने की बात तो होनी ही नहीं चाहिए. रघुवर दास अनाप-सनाप बयान देने के लिए विख्यात हो चुके है. वे हर रोज कोई न कोई बयान दे रहे हैं. लोग उन्हें घोषणा दास कहने लगे हैं.

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