
चाईबासा।
झारखण्ड सरकार गरीबों की जमीन लूटने का प्रयास कर रही है। साथ ही कॉरपोरेट घरानों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का काम कर रही है। इसे आदिवासी-मूलवासी कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। इसे लेकर आने वाले समय में और उग्र आंदोलन किया जायेगा। यह बातें कांग्रेस जिला सचिव त्रिशानु राय ने गुरुवार को कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा । उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने स्थानीय व्यक्ति को परिभाषित करने के बदले स्थानीय निवासी की परिभाषा को लागू कर हम आदिवासियों को समाप्त करना चाहती है और दूसरे राज्यों से आये लोगों को यहां का स्थायी निवासी और मालिक बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार का मन इससे भी नहीं भर रहा है, तो वह सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन कर गरीब आदिवासियों की जमीन हड़पने का प्रयास कर रही है। सीएनटी एक्ट 1908 और एसपीटी एक्ट 1949 का संशोधन अध्यादेश 2016 जारी करने का यह तात्पर्य है कि अनुसूचित जनजातियों का विनाश का द्वार खोलना और उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के विकास का। जबकि हर व्यक्ति समझता है कि आदिवासी का जीवन जमीन से उसी तरह जुड़ा हुआ है, जैसे मछली का पानी से। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों को बेघर करने पर तुली हुई है। सरकार कृषि योग्य भूमि को कॉरपोरेट घरानों को देना चाह रही है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन का अध्यादेश जल्द से जल्द वापस ले। नहीं तो इसे लेकर इससे भी उग्र आंदोलन किया जायेगा। मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष विसु मुंडा ने कहा कि संसद द्वारा बनाये कानून पेसा, 1996 ने आदिवासियों को अनुसूचित जिलों में स्वःशासन देकर मालिक ही नहीं बल्कि अपने हित में निर्णय लेने का शक्ति प्रदान करता है।
बिरसा मुंडा के शब्दों में इसे अबुआ दिसुम अबुआ राज कहा जा सकता है। इस एक्ट 1996 के तहत अनुसूचित जनजातियों को जल, जंगल, जमीन, जन जानवर संस्कृति, भाषा और परंपरागत रीति रिवाज को सुरक्षा करने का अधिकार प्रदान करता है। लेकिन वर्तमान सरकार इस एक्ट में संशोधन कर आदिवासियों-मूलवासियों को सड़क पर लाना चाहती है। त्रिशानु राय ने कहा कि रघुवर सरकार द्वारा न केवल सीएनटी एक्ट 1908 और एसपीटी एक्ट 1949 को संशोधन किया जा रहा है बल्कि गैर मजरुवा, बंदोबस्ती, खुदकट्टी, भूईंहरी, मसना और परती जमीनों को भी सरकार अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अपने देश में अपना राज की स्थापना के लिए केंद्रीय कानून पीपेसा 1996 के प्रावधानों के आलोक में अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासी जिला परिषद और विशेष ग्राम सभा अपवादों एवं उपान्तरनों के तहत स्थापित करने की मांग करते हैं। रघुवर सरकार करोड़पतियों का साथ और आदिवासियों का विनाश कर रही है। उन्होंने रघुवर सरकार को बाहरी करार देते हुए कहा कि राज्य के विकास पर तुली हुई है सरकार। राज्य सरकार गरीबों के लिए नहीं पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है। विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा ने तरह तरह के लालच देकर सत्ता में आयी, लेकिन यहां के आदिवासियों-मूलवासियों के विकास के लिए अभी तक कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार सिर्फ घोषणाओं की सरकार है। राज्य में विकास नहीं के बराबर हो रहा है। यहां के आदिवासी- मूलवासी भूखे रहने को विवश हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई लेना देना नहीं है।

