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Home » सहरसा-मिनी बाबा धाम का रूप् ले रहा है कांठो स्थित बाबा मटेश्वर धाम
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सहरसा-मिनी बाबा धाम का रूप् ले रहा है कांठो स्थित बाबा मटेश्वर धाम

BJNN DeskBy BJNN DeskJuly 11, 2016Updated:July 11, 2016No Comments3 Mins Read
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महेन्द्र प्रसाद,

सिमरी बख्तियारपुर ;सहरसा 

बाबा मटेश्वर धाम में श्रावणी मेला की तैयारी शुरू  25 जुलाई से प्रारंभ होगी  श्रावणी मेला

मिनी बाबाधाम के रूप में प्रसिद्ध बाबा मटेश्वर धाम की महिमा अपार है।  पर यहां हजारों लोगों के जुटने की संभावना है। जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर एवं सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मटेश्वरधाम में उमड़ रही भीड़ के कारण यह आस्था का प्रमुख केन्द्र बनता जा रहा है। .

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* स्वयं अंकुरित है शिवलिंग– … मटेश्वरधाम का अनोखा शिवलिंग स्वयं अंकुरित है। यह शिवलिंग 14 वीं शताब्दी की बतायी जाती है। समतल जमीन से 30.40 फीट उंचे टीले पर स्थापित काला पत्थर के शिवलिंग की मोटाई करीब 4 फीट तथा ऊंचाई ढ़ाई फीट है। शिवलिंग के चारों तरफ एक इंच की चौड़ाई में खाली स्थान है। गर्मी के मौसम में खाली स्थान पानी से लबालब भरा रहता है। जबकि बरसात में इसका जलस्तर काफी नीचे चला जाता है। वर्ष 2003 में शकराचार्य बासुदेवानंद सरस्वती ने इस शिवलिंग का दर्शन कर कहा था कि ऐसा अद्भूत शिवलिंग मैंने पहली बार देखा है। यह दुनिया का अनोखा शिवलिंग है। बताया जाता है कि यह मंदिर पत्थर से निर्मित था। लेकिन औरंगजेब शासन काल में इसे तोड़ दिया गया था। अभी भी मंदिर के अवशेष प्रांगण में पड़ा हुआ है। … मंदिर का नये सिरे से हुआ निर्माण … करीब सौ साल पहले बघवा गाव के सत्यदेव राय को भगवान शिव स्वप्न में आये थे। उसके बाद उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर परिसर के चारों तरफ जब समय.समय पर खुदाई की गयी तो पुरानी मूर्तियां पत्थर एवं अन्य निर्मित सामान मिले थे। वर्तमान में मटेश्वर धाम के चारों तरफ करीब 22 एकड़ जमीन है। मंदिर के ठीक सामने सौ मीटर की दूरी पर अवस्थित पोखर है। जिसकी खुदाई करने के क्रम में 9 कुएं मिले थे। कहा जाता है कि एक गुंगा साधू मुशहरू दास मंदिर के दक्षिण दिशा में खुदाई करने के लिए हमेशा इशारे से प्रेरित किया करते थे। जब ग्रामीणों द्वारा खुदाई की गयी तो एक.से.एक पत्थर एवं बहुमूल्य मूर्ति मिली। वर्ष 2007 में पुरातत्व विभाग के निदेशक डा फनीकांत मिश्र द्वारा मटेश्वरधाम का भ्रमण करने के क्रम में मंदिर परिसर की खुदाई से निकले सामान देख आश्चर्य व्यक्त किया था। उन्होंने भगवान शनि की मूर्ति को भारत का दूसरा मूर्ति बता कर इस मटेश्वरधाम को सेटेलाईट के माध्यम से भारत के मानचित्र पर लाने का आश्वासन दिया था। ..

* शिव पुराण में है चर्चा –— शिव पुराण में बाबा मटेश्वर का नाम मृत्येश्वर के नाम से वर्णित है जो सृष्टि में एक है। ग्रामीण लोग पहले बुढ़वामठ कहा करते थे। काठो निवासी मुन्ना भगत को किशोरावस्था में ही वर्ष 1997 में  अपने मित्रों शिवेन्द्र पोद्दार सिकेन्द्र साह, संजय चौरसिया, मंगल साह, सत्यनारायण साह,विनोद सिंह, अशोक यादव, अशोक साह, पिताम्बर, हरेराम सिंह, विरबल साह को प्रेरित कर अपनी व्यवस्था से पहली बार कावंरिया बम की शुरूआत की। मटेश्वर धाम से 80 किलोमीटर दूर मुंगेर घाट.छर्रापट्टी गंगा नदी से जल भरकर खगड़ियाए मानसी बलहाबाजार,बदला घाट, कात्यायनी स्थान, धमारा घाट, कोपरिया स्टेशन तक रेल पटरी के किनारे पत्थरनुमा पगडंडी पर कष्टदायक यात्रा कर सिमरी बख्तियारपुर के रास्ते मटेश्वरधाम पहुंच कर अद्भूत शिवलिंग पर जलाभिषेक एवं पूजा.अर्चना कर इतिहास रच दिया।

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