दिनभर हुए विरोध के बाद भाजपा महानगर अध्यक्ष परद का चुनाव टला
दावेदारों की लंबी कतार एवं आरएसएस को अलग- थलग करने के कारण टला चुनाव प्रभारी नहीं पहुंचे
संतोष कुमार
जमशेदपुरः शनिवार को होनेवाले पूर्वी सिंहभूम जिला महानगर भाजपा जिलाध्यक्ष चुनाव हंगामें के कारण टल गया. आमतौर पर अनुशासित पार्टी के रूप में जानी जानेवाली भारतीय जनता पार्टी में जिलाध्यक्ष के चुनाव को लेकर अनुशासन तार- तार हो गई. पर्यवेक्षकों के सामने ही पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. हालांकि सूत्रों के अनुसार जो बातें सामने आयीं उसमें पता चला कि जिल्धक्ष पद के चयन के लिए भाजपा द्वारा आरएसएस को दरकिनार करने के कारण ही आरएसएस वालों की ओर से जिलाध्यक्ष चुनाव का बहिष्कार किया गया. हालांकि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा आरएसएस कार्यकर्तों के साथ बदसलूकी किए जाने के कारण भी हंगामा काफी व्यापक रूप ले लिया. अंततः स्थानीय थाना (बिष्टुपुर) से पुलिसबलों के पहुंचने के बाद थोड़ी देर के लिए माहौल शांत हुआ लेकिन पुनः जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों के समर्थकों की ओर से विरोध शुरू हो गया. जिसके बाद पर्यवेक्षक बगैर कोई फैसला किए परिसदन में चले गए. वहां भी वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ पर्यवेक्षकों ने बैठक की जिसके बाद चुनाव को टालने एवं पार्टी के वरीय नेतृत्व को अवगत कराने की बात कहते हुए चुनाव के लिए बतौर पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए प्रदीप वर्मा एवं कुलविंदर शेट्टी वापस लौट गए. हालांकि चुनाव प्रभारी शहर के बाहर किसी गुप्त ठिकाने पर ही रूके रहे.
पार्टी कार्यकर्ता उत्साहित हैं कोई विरोध नहीः पर्यवेक्षक
दाद देनी होगी जिलाध्यक्ष के चुनाव को संपन्न कराने पहुंचे पर्यवेक्षक प्रदीप वर्मा की जिन्होंने अपनी आंखो के सामने अनुशासित पार्टी का अनुशासन देखा. पार्टी कार्यकर्ताओं का विरोध देखा, कुर्सियां टूटते देखा, कॉलर पकड़ते देखा, धक्का मुक्की करते देखा बावजूद इसके उन्होंने मीडिया के सामने पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित बताते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष के चुनाव को लेकर उत्साहित हैं जिस कारण सभी अपने- अपने स्तर से खुशियां प्रकट कर रहे हैं. पार्टी में किसी प्रकार का विरोध नहीं होने की बात किए मगर बगैर चुनाव कराए वापस लौट गए.
पार्टी की छवि धुमिल हुई कारणों की जांच कराई जाएः सतीश सिंह
जिलाध्यक्ष चुनाव हंगामा के कारण टलने से उपाध्यक्ष सतीश सिंह ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि इस प्रकरण से पार्टी की छवि धूमिल हुई है. उन्होंने बताया कि आखिर किसी को क्या हासिल हुआ. जिस पार्टी को अनुशासित पार्टी कहा जाता रहा है, उसी पार्टी के कार्यकर्ता अनुशासनहीनता पर उतर गए. कार्यकर्ता इतने उन्मादित थे कि किसी की बातों को मानने को तैयार ही नहीं थे. जिलाध्यक्ष के चुनाव टलने के पीछे के कारणों की जांच कराने की बातों का उन्होंने समर्थन करते हुए कहा कि वरीय प्रबंधन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए एवं पार्टी की छवि धूमिल करने में जो भी शामिल हैं उनपर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा कि जिलाध्यक्ष के चुनाव को लेकर पार्टी के वरिष्ट नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की सहमति को लेनी ही चाहिए थी. आरएसएस पार्टी का अभिन्न अंग है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता.
मतदाता सूची को लेकर कार्यकर्ता विरोध करते देखे गए
जिलाध्यक्ष चुनावको लेकर पार्टी आलाकमान की ओर से जो मतदाता सूची जारी की गई थी पार्टी के कार्यकर्ता उससे संतुष्ट नहीं लग रहे थे. पहले तो पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा उसी का विरोध किया गया. जिसके बाद विवाद धीरे- धीरे इतना बढ़ा कि लगभग दर्जन भर दावेदारों के समर्थक कुर्सियां पटकने से लेकर कॉलर पकड़ने पर उतारू हो गए. इतना ही नहीं कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस करते भी देखे गए. मगर वे अपनी मजबूरी को व्यक्त नहीं कर सके.
शनिवार को जिलाध्यक्ष का चुनाव यदि हो जाता तो दिनेश कुमार के जीतने की प्रबल संभावना बनी थी
सूत्रों के हवाले से प्राप्त खबरों के अनुसार वर्तमान जिलाध्यक्ष नंदजी प्रसाद की कार्यशैली से भाजपा का एक बड़ा खेमा के नाराज होने की बातें सामने आयीं है. पार्टी के बड़े कार्यकर्ताओं के बीच भी उनके खिलाफ नाराजगी देखी गई. शनिवार को जिस विरोध का नजारा देखा गया उसके पीछे भी कुछ लोग उन्हें ही जिम्मेवार बता रहे थे. हालांकि जिलाध्यक्ष पद के लिए जितने भी दावेदार थे उसमें गोलमुरी मंडल अध्यक्ष दिनेश कुमार का नाम सबसे आगे चल रहा था. सूत्रों की यदि मानें तो दिनेश कुमार के नाम पर सभी मंडल अध्यक्षों के बीच सहमति बन गई थी जिसके बाद वर्तमान जिलाध्यक्ष के समर्थकों की ओर से पूरा माहौल ही बिगाड़ने का काम किया गया ताकि कुछ समय के लिए इसे टाला जा सके. हालांकि मुकुल मिश्रा भी अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे थे.
नए सिरे से प्रक्रिया की जाएगी तिथि की घोषणा नहीं
वहीं पर्यवेक्षकों ने शहर से जाते- जाते जिलाध्यक्ष के चुनाव को नए सिरे से कराए जाने एवं आलाकमान के निर्देशन के बाद पुनः तिथि की घोषणा ककरने की बातें कहीं. हालांकि सूत्रों के अनुसार राजधानी रांची से ही जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी.
पुलिस को करकनी पड़ी काफी मशक्कत
भाजपा कार्यकर्ताओं के उग्र रूप को देखते हुए मौके पर पहुंची बिष्टुपुर थाना पुलिस द्वारा काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका, पुलिस बल भी कुछ समझ नहीं पा रहे थे. आखिर में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाला एवं किसी प्रकार से प्रशासन को सहयोग करते हुए हंगामा शांत कराया.
